राजिम। गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं करना एक पंचायत सचिव को महंगा पड़ गया। ग्राम पंचायत कोसमखूंटा के पंचायत सचिव कोमल राम साहू को जिला पंचायत प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) प्रखर चंद्राकर ने इस संबंध में निलंबन आदेश जारी किया है। मामला उस समय चर्चा में आया था, जब कार्यक्रम में मौजूद प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल मंच संचालन के दौरान हुई लापरवाही से नाराज हो गए थे।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पोखरा में सुशासन तिहार कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जिले के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। कार्यक्रम में पंचायत सचिव कोमल राम साहू मंच संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे थे। इसी दौरान प्रोटोकॉल के पालन में कथित रूप से गंभीर लापरवाही सामने आई।

बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और जनप्रतिनिधियों के संबोधन एवं मंचीय व्यवस्था के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। इसे लेकर कार्यक्रम में मौजूद प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल नाराज हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंत्री ने मंच से ही नाराजगी जाहिर की और पंचायत सचिव को मंच संचालन से हटाने के निर्देश दिए।

घटना का वीडियो और खबर सामने आने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया गया। बाद में जिला पंचायत प्रशासन ने पूरे मामले की समीक्षा की। जांच के बाद यह पाया गया कि कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल संबंधी निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया गया, जिससे शासन और प्रशासन की गरिमा प्रभावित हुई।

इसी आधार पर जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने पंचायत सचिव कोमल राम साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जनपद पंचायत कार्यालय निर्धारित किया गया है। प्रशासनिक आदेश में कहा गया है कि शासकीय कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

इस घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों को शासकीय कार्यक्रमों के दौरान नियमों और प्रोटोकॉल के पालन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा सुशासन तिहार कार्यक्रम के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं के समाधान और योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों में मंत्री, विधायक, अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रहती है, जिसके चलते मंच संचालन और प्रोटोकॉल व्यवस्था को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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By Chhattisgarh Kranti

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