बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में मौसी की बेटी से की गई शादी को कानूनन अवैध करार दिया है। यह मामला जांजगीर-चांपा जिले से जुड़ा है, जहां वर्ष 2018 में एक युवक ने अपनी मौसी की बेटी से विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की। याचिकाकर्ता का तर्क था कि दोनों की माताएं सगी बहनें हैं, इसलिए यह विवाह कानून के दायरे में वैध नहीं है। मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने स्थानीय प्रथा का हवाला देते हुए इस विवाह को वैध माना था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और स्पष्ट किया कि ऐसी शादी हिंदू विवाह कानून के तहत निषिद्ध संबंधों में आती है, इसलिए यह वैध नहीं मानी जा सकती। महिला को मिलता रहेगा गुजारा भत्ता साथ ही अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि विवाह भले ही शून्य घोषित कर दिया जाए, लेकिन महिला को गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) लेने का अधिकार बना रहेगा। इस फैसले को सामाजिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है। Post Views: 162 Please Share With Your Friends Also Post navigation बिलासपुर में ईडी की रेड, कारोबारी के ठिकाने से 17KG सोना-हीरों का हार जब्त, 22 घंटे की जांच देर रात तक चली कांस्टेबल की मौत से प्राइवेट हॉस्पीटल की व्यवस्था सवालों में, परिजनों ने अस्पताल व डाक्टरों पर कार्रवाई की मांग की