बिलासपुर। विभागीय सजा को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। होईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बिना विभागीय जाच और चार्जशीट के किसी भी कर्मचारी की वेतन वृद्धि नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इसी दलील के साथ कोरबा जिले में पदस्थ रहे पुलिस इंस्पेक्टर की सजा को रद्द कर दिया। आपको बता दें कि कोरबा के रहने वाले इंस्पेक्टर केके पाडेय एसपी आफिस में पदस्थ थे। उन पर एक आपराधिक मामले में वारंट तामिल कराने में लापरवाही का आरोप लगा। जिसके बाद कोरबा के तत्कालीन एसपी ने उन्हे शो कॉज नोटिस भेजा। इंस्पेक्टर की तरफ से भेजे गये जवाब से असंतुष्ट होकर एसपी ने इंस्पेक्टर के वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी। विभाग की इस सजा पर नाराजगी जताते हुए इंस्पेक्टर केके पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इंस्पेक्टर की तरफ से मामले की पैरवी अभिषेक पांडेय व ञषभदेव साहू ने की। दोनों अधिवक्ताओं ने कोर्ट में पक्ष रखा कि, अगर कर्मचारी आरोपों से इनकार करता है और विभाग सजा देना चाहता है तो पहले चार्जशीट देनी होगी, वहीं विभागीय जांच भी करानी होगी। लेकिन केके पांडेय के प्रकरण में ना तो विभागीय जांच हुई और ना ही चार्जशीट दी गयी, सीधे वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गयी। जो सेवा नियमावली के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बिना चार्जशीट व जांच के दी गयी सजा को गैरकानूनी मानते हुए इंस्पेक्टर को दी गयी सजा को भी रद्द कर दिया। Post Views: 41 Please Share With Your Friends Also Post navigation चलती कार में जमकर पथराव, कार सवार महिला बुरी तरह से जख्मी, एमपी जा रहा था परिवार चलती ट्रेन से किशोरी को धक्का देकर हत्या, तीन गिरफ्तार