बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों की सुनवाई में महिलाओं और छोटे बच्चों के हितों को प्राथमिकता देने वाला महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिन महिलाओं पर छोटे बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी है, उन्हें हर सुनवाई के लिए लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर करना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक। इसी आधार पर कोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में लंबित तलाक के मामले को कवर्धा फैमिली कोर्ट स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

दुर्ग में चल रहा था तालाक का मामला 

मामला रेखा उर्फ सीमा पात्रे और उनके पति रामचंद पात्रे से जुड़ा है। दोनों का विवाह 20 जून 2008 को हुआ था और उनके चार बच्चे हैं। पारिवारिक विवाद के बाद महिला अपने मायके पंडरिया (जिला कबीरधाम) में रहने लगी। इस बीच पति ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी, जिसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट में ट्रांसफर याचिका दाखिल की।

महिला ने कोर्ट में बताई अपनी परेशानी

महिला की ओर से अदालत को बताया गया कि कवर्धा से दुर्ग तक प्रत्येक सुनवाई के लिए लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। उसके तीन नाबालिग बच्चों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उसी पर है। ऐसे में बार-बार इतनी लंबी दूरी तय करना उसके लिए आर्थिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन है। अदालत को यह भी बताया गया कि भरण-पोषण का एक मामला पहले से ही कवर्धा की अदालत में लंबित है।

पति ने किया विरोध

पति की ओर से दलील दी गई कि दुर्ग और कवर्धा के बीच बस एवं ट्रेन की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है, इसलिए स्थानांतरण की आवश्यकता नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि पत्नी स्वयं घर छोड़कर गई थी और उसकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर है, इसलिए ट्रांसफर याचिका खारिज की जाए।

हाईकोर्ट ने महिला को दी राहत

जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि छोटे बच्चों की जिम्मेदारी निभा रही महिला को बार-बार लंबी दूरी तय करने के लिए बाध्य करना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी माना कि संबंधित भरण-पोषण का मामला पहले से कवर्धा में लंबित है, इसलिए दोनों मामलों की सुनवाई एक ही स्थान पर होना न्यायहित में है।

हाईकोर्ट ने दुर्ग फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों के भीतर पूरे मामले का रिकॉर्ड कवर्धा फैमिली कोर्ट को भेजे। साथ ही कवर्धा फैमिली कोर्ट को रिकॉर्ड प्राप्त होने के चार महीने के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने पति को यह भी राहत दी कि जिन तारीखों पर उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं होगी, उन अवसरों पर वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी सुनवाई में शामिल हो सकेगा।

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By Chhattisgarh Kranti

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