नई दिल्ली। वजन घटाने की शुरुआत करते ही लोग सबसे पहले अपनी थाली से कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह गायब कर देते हैं। इसमें भी सबसे पहला निशाना बनता है सबका पसंदीदा सफेद चावल। सोशल मीडिया पर फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और रील्स की दुनिया में यह बात मजबूती से फैलाई जा रही है कि अगर मोटापा कम करना है, तो सफेद चावल को तुरंत छोड़कर उसकी जगह ब्राउन राइस अपनाना होगा। लेकिन दिल्ली के बड़े अस्पतालों के आहार विशेषज्ञों (Dieticians) ने इस धारणा को महज एक ट्रेंड बताया है और इसके पीछे के मेडिकल साइंस को सामने रखा है।


प्रोसेसिंग का खेल: कैसे बदल जाता है धान का रंग और गुण
एम्स (AIIMS) नई दिल्ली की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, सफेद और ब्राउन राइस में सबसे बड़ा अंतर स्वाद या रंग का नहीं, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग का है। जब खेतों से धान की कटाई होकर आती है, तो शुरुआती दौर में वह ब्राउन राइस ही होता है। इस रूप में चावल की बाहरी परतें यानी ब्रान (Bran) और जर्म (Germ) पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं। ब्रान फाइबर का मुख्य जरिया है, जबकि जर्म के भीतर जरूरी विटामिंस और मिनरल्स मौजूद होते हैं।


जब इसी चावल को मिलों में मशीनों के जरिए पॉलिश किया जाता है, तो ये दोनों पौष्टिक परतें पूरी तरह हट जाती हैं। इस रगड़ और पॉलिशिंग के बाद जो चमकीला सफेद हिस्सा बचता है, उसे हम सफेद चावल कहते हैं। परतों के हटने से इसके मूल पोषक तत्व काफी कम हो जाते हैं।

मेडिकल साइंस के नजरिए से तीन बड़े अंतर
डॉक्टरों ने दोनों चावलों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए तीन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया है:

फाइबर की मात्रा: सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस में लगभग 2 से 3 गुना ज्यादा फाइबर पाया जाता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI): सफेद चावल का जीआई स्तर काफी ज्यादा (लगभग 70-75) होता है, जो खाते ही खून में शुगर की मात्रा को तेजी से बढ़ाता है। इसके उलट, ब्राउन राइस का जीआई (50-55) मध्यम श्रेणी में आता है, जिससे शरीर को धीरे-धीरे और लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है।
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स: पॉलिश न होने के कारण ब्राउन राइस में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और बी-विटामिन्स जैसे जरूरी तत्व सफेद चावल के मुकाबले कहीं अधिक बचे रहते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट: क्या ब्राउन राइस खाने से रातों-रात कम होगा वजन?
“लोग वजन घटाने के चक्कर में सफेद चावल छोड़कर केवल ब्राउन राइस खाना शुरू कर देते हैं और सोचते हैं कि जादू हो जाएगा। यह पूरी तरह गलत है। वजन घटाने का एकमात्र विज्ञान कैलोरी डेफिसिट (खाए जाने वाली कैलोरी से ज्यादा कैलोरी बर्न करना) है। एक कटोरी सफेद चावल और एक कटोरी ब्राउन राइस की कैलोरी में सिर्फ 10 से 20 कैलोरी का मामूली अंतर होता है। अगर आप कैलोरी कंट्रोल नहीं कर रहे हैं, तो सिर्फ चावल बदलने से वजन कम नहीं होगा।”
— सीनियर कंसलटेंट (Metabolic Disorders), सफदरजंग एन्क्लेव, नई दिल्ली

आम जनता पर असर: बजट और सेहत का संतुलन कैसे बनाएं
दिल्ली के कनॉट प्लेस और लाजपत नगर के बाजारों में ऑर्गेनिक फूड्स की बढ़ती मांग के बीच ब्राउन राइस की कीमतें सफेद चावल से दोगुनी या तिगुनी तक हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए केवल वजन घटाने के नाम पर महंगा चावल खरीदना जेब पर भारी पड़ रहा है।

डाइट एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अगर आप सफेद चावल खाना चाहते हैं, तो उसका तरीका बदलें। चावल को सीधे मांड (पानी) निकालकर पकाएं जिससे उसका अतिरिक्त स्टार्च कम हो जाए। इसके अलावा, सफेद चावल को अकेले खाने के बजाय उसके साथ खूब सारी हरी सब्जियां, दाल या सलाद शामिल करें। ऐसा करने से पूरी थाली का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपने आप कम हो जाता है और शरीर को पर्याप्त फाइबर भी मिल जाता है। इसलिए, बिना सोचे-समझे किसी सोशल मीडिया ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय अपनी डाइट के कुल पोर्शन (मात्रा) पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

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By Chhattisgarh Kranti

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