बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन मामलों में विभागीय प्रक्रिया के पालन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए एक प्रधान पाठक की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि जब कानून में विभागीय अपील का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है, तब सीधे रिट याचिका दायर करना उचित नहीं माना जा सकता। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने यह आदेश बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक स्थित शासकीय प्राथमिक शाला की प्रधान पाठक आरती बाला आदिल की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा जारी निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दरअसल, आरती बाला आदिल को 20 मई 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी, बेमेतरा द्वारा निलंबित कर दिया गया था। निलंबन आदेश जारी होने के बाद उन्होंने सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। याचिका में निलंबन को गलत बताते हुए राहत की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबन आदेश के खिलाफ विभागीय अपील का वैधानिक प्रावधान उपलब्ध है। ऐसे में याचिकाकर्ता को पहले विभागीय स्तर पर उपलब्ध उपायों का उपयोग करना चाहिए था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि सेवा संबंधी मामलों में जब वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध हो, तब सीधे रिट याचिका पर सुनवाई करना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि निलंबन आदेश को चुनौती देने के लिए संबंधित विभाग के समक्ष अपील दायर की जा सकती है और उसी प्रक्रिया का पहले पालन किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए यह अनुमति दी कि वे 30 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विभागीय अपील प्रस्तुत कर सकती हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि अपील प्राप्त होने के बाद उसका त्वरित और नियमों के अनुरूप निराकरण किया जाए, ताकि मामले में अनावश्यक देरी न हो। Post Views: 135 Please Share With Your Friends Also Post navigation बहला-फुसलाकर 10 साल की बच्ची से रेप, ड्रोन की मदद से पकड़ाया आरोपी कानून का खौफ नहीं ! हाईवे पर शैंपेन उड़ाकर रैंप वॉक करती लड़की का वीडियो सोशल वायरल….