रायपुर। आखिरकार महासमुंद डीईओ को निलंबित कर दिया गया है। महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक आपत्तिजनक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। जिस पर चली लंबी जांच के बाद अब डीईओ पर कार्रवाई हुई है। जांच रिपोर्ट में डीईओ की भी गंभीर लापरवाही सामने आयी थी। जिसके बाद सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय कुमार लहरे को निलंबित कर दिया है। दरअसल, अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में कुत्ते के नाम के रूप में “राम” का उल्लेख किया गया था। यह मामला सामने आते ही अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों में नाराजगी फैल गई। लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। जांच में पाया गया कि प्राथमिक शालाओं के अर्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों के निर्धारण, मुद्रण और वितरण की पूरी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की थी। इसके बावजूद डीईओ विजय कुमार लहरे द्वारा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया के लिए न तो कोई स्पष्ट कार्ययोजना बनाई गई और न ही उचित मॉनिटरिंग की गई। इसी लापरवाही के चलते इस तरह की गंभीर त्रुटि सामने आई। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी ने पूर्व में भी अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरती थी। उच्च न्यायालय बिलासपुर में लंबित एक प्रकरण (WPS No. 1745/2022) में उन्हें प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की और अपील भी दायर नहीं की। यहां तक कि विभागीय विधि शाखा द्वारा व्हॉट्सऐप के माध्यम से अवगत कराने के बावजूद उन्होंने निर्देशों की अनदेखी की। वहीं, विभागीय लेखा परीक्षण (ऑडिट) में भी उनके कार्यकाल के दौरान कई अनियमितताएं पाई गईं। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए शासन ने इसे गंभीर कदाचार माना और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय रायपुर स्थित संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) कार्यालय निर्धारित किया गया है। साथ ही, आगामी आदेश तक बी.एल. देवांगन को महासमुंद जिले का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। निलंबन अवधि में लहरे को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में इस तरह की लापरवाही न केवल छात्रों पर असर डालती है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है। शासन की इस कार्रवाई को एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि भविष्य में इस तरह की त्रुटियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Post Views: 16 Please Share With Your Friends Also Post navigation रायगढ़ में अनोखी शादी, दूल्हा-दुल्हन ने जलते अंगारों पर चलकर की नई जिंदगी की शुरूआत