रायपुर। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अंबिकापुर में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों के बीच बिना टेंडर मंत्री के करीबी ठेकेदारा को करोड़ों का काम दे दिया गया है। स्थानीय वेंडरों ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के लिए बजट और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही टेंट और डोम लगाने का काम शुरू कर दिया गया।

स्थानीय वेंडरों का कहना है कि कार्यक्रम 21 जून को होना है, जबकि बजट 17 जून को स्वीकृत हुआ। इसके बावजूद 15 जून से ही पीजी कॉलेज परिसर में टेंट का सामान उतारना और डोम तैयार करना शुरू कर दिया गया था। उनका आरोप है कि इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

वेंडरों का कहना है कि अंबिकापुर में कई अनुभवी एजेंसियां हैं, जिन्होंने पहले भी बड़े सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं। इसके बावजूद किसी विशेष वेंडर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। मामले को लेकर पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। सरकारी कार्यों में पारदर्शिता नहीं दिखाई दे रही है।

वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 16 जून को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा योग दिवस का आदेश जारी किया गया, 17 जून को समाज कल्याण विभाग ने योग आयोग को 6 करोड़ जारी किया, लेकिन उससे पहले 15 जून से ही कार्यक्रम स्थल पर तैयारियां शुरू हो गई थी।

इस मामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि 21 जून के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री और लगभग 3,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम से संबंधित बजट, टेंडर प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाएं राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई है।

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By Chhattisgarh Kranti

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