बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित State Bank of India (SBI) की बिल्हा शाखा में करोड़ों रुपये के गबन के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी Economic Offences Wing Chhattisgarh (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में तत्कालीन कैश ऑफिसर तेजवथ थिराप्पतम्मा के खिलाफ विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र (चालान) पेश किया गया है। आरोप है कि बैंक अधिकारी ने चाय, नाश्ता, भोजन और रखरखाव जैसे खर्चों के नाम पर फर्जी तरीके से दो करोड़ छह लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन किया। जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला भारतीय स्टेट बैंक की बिल्हा शाखा से जुड़ा है। शाखा प्रबंधक की लिखित शिकायत के आधार पर मुख्यालय EOW/ACB रायपुर में 19 जनवरी 2026 को अपराध क्रमांक 03/2026 दर्ज किया गया था। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। प्रकरण की जांच एसीबी बिलासपुर द्वारा की गई। जांच के दौरान सामने आया कि तत्कालीन कैश ऑफिसर तेजवथ थिराप्पतम्मा ने अपनी पदस्थापना के दौरान 19 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 के बीच बैंक के बीजीएल (BGL) खातों में अनधिकृत और फर्जी प्रविष्टियां कीं। आरोप है कि उसने बैंक खाताधारकों के खातों का उपयोग करते हुए बैंक के आंतरिक खातों में जाली एंट्री तैयार की और लोकधन को आरटीजीएस के माध्यम से विभिन्न थर्ड पार्टी खातों में ट्रांसफर कर दिया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुल 2 करोड़ 6 लाख 37 हजार 600 रुपये की राशि को बैंक से संबंधित सेवाओं — जैसे भोजन, पेय पदार्थ, संपत्तियों के रखरखाव और अन्य खर्चों के नाम पर दर्शाया गया। हालांकि जांच में यह खर्च फर्जी पाए गए। आरोप है कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अन्य लोगों के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। मामले में जांच एजेंसी ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 26 फरवरी 2026 को आरोपी कैश ऑफिसर तेजवथ थिराप्पतम्मा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद विस्तृत विवेचना और दस्तावेजी जांच पूरी की गई। अब EOW ने आरोपी के खिलाफ चालान तैयार कर 26 मई 2026 को विशेष न्यायालय बिलासपुर में पेश कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में अन्य संदिग्धों और संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस गबन में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा फर्जी ट्रांजेक्शन के जरिए भेजी गई रकम का उपयोग कहां किया गया। इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक निगरानी और वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते अनियमितताओं का पता नहीं चलता, तो गबन की राशि और भी बढ़ सकती थी। वहीं EOW की कार्रवाई के बाद बैंकिंग क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि लोकधन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। Post Views: 29 Please Share With Your Friends Also Post navigation कैबिनेट के बड़े फैसले: स्क्रैप नीलामी समझौता बढ़ा, कर्मचारी चयन मंडल अब सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन बहला-फुसलाकर 10 साल की बच्ची से रेप, ड्रोन की मदद से पकड़ाया आरोपी