कवर्धा। रोड बनाया जाता है, लोगों को सहुलियत देने, दुर्घटनाओं से बचाव के लिए, लेकिन हैरानी की बात ये है कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसी सड़क बनी है, जो अगर चालू हो गयी, तो आये दिन सड़क हादसे होंगे और लोगों की जान जायेगी। चौकाने वाला ये मामला कवर्धा जिले का है, जहां पिपरिया से गांगपुर मार्ग पर निर्माणाधीन सड़क के बीचोंबीच बिजली के पोल छोड़ दिए गए हैं। करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सड़क को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सड़क के बीच खड़े पोल कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इस हैरान करने वाले मामले ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग द्वारा करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 4 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। सड़क निर्माण का उद्देश्य क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन सुविधा देना था, लेकिन निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही अब लोगों की जान के लिए खतरा बनती दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के बीच खड़े बिजली के पोल दुर्घटनाओं को खुला न्योता दे रहे हैं। खासकर रात के समय वाहन चालकों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों का आरोप है कि निर्माण शुरू होने से पहले बिजली विभाग और ठेकेदार के बीच समन्वय नहीं किया गया, जिसके कारण पोल हटाए बिना ही सड़क का निर्माण कर दिया गया।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य में मूलभूत सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली पोल नहीं हटाए गए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है और बीच सड़क पर खड़े पोल दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की है।

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने नाराजगी जताई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि सड़क निर्माण के दौरान विभागीय अधिकारी निरीक्षण करने पहुंचे थे या नहीं। वहीं यह भी चर्चा है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था की सही तरीके से निगरानी नहीं की गई।

फिलहाल इस मामले में पीडब्ल्यूडी विभाग या संबंधित ठेकेदार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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By Chhattisgarh Kranti

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