रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पेश होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया, जिसके बाद विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और चर्चा को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि इस विषय से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं, जिनमें मध्यप्रदेश समेत 11 राज्यों के धर्म स्वातंत्र्य कानून शामिल हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय आने से पहले इस तरह का विधेयक लाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पर अभी चर्चा नहीं होनी चाहिए। विजय शर्मा ने कहा, कोई स्टे नहीं विपक्ष की आपत्तियों पर जवाब देते हुए विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर कोई रोक (स्टे) नहीं लगाई है और नए कानून बनाने पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक राज्य के हित में है और इस पर सदन में विस्तृत चर्चा की जाएगी। उनके जवाब के बाद आसंदी ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया और विधेयक को पुनः प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी। विपक्ष ने किया बहिष्कार इस निर्णय के बाद विपक्ष ने विरोध जताते हुए पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष की गैरमौजूदगी में ही विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ाई गई।विधानसभा में विधेयक पर चर्चा की शुरुआत भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और इसमें धर्मांतरण से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश को धर्म के आधार पर विभाजित करने का काम पहले कांग्रेस ने किया और अब इस तरह के कानून की आवश्यकता इसलिए पड़ी है। धरमलाल कौशिक बोले चर्चा के दौरान भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि केवल धर्मांतरण ही नहीं, बल्कि “मतांतरण” भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना नाम बदले और पहचान बदले भी लोगों का ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है, जिससे खासकर अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान जरूरी बताया।विधेयक को लेकर सत्तापक्ष का दावा है कि इससे अवैध धर्मांतरण पर रोक लगेगी और सामाजिक संतुलन बना रहेगा। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दा बताते हुए इसका विरोध कर रहा है। मुख्यमंत्री ने दी प्रतिक्रिया इसी बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जशपुर रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि यह विधेयक सभी को अपनी बात रखने का अवसर देगा। उन्होंने चैत्र नवरात्रि के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्य की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर काम कर रही है और इसी दिशा में यह विधेयक भी लाया गया है। Post Views: 19 Please Share With Your Friends Also Post navigation छत्तीसगढ़ के IAS रवि मित्तल को PMO में बड़ी जिम्मेदारी, CPR से बने उप सचिव जबदस्ती धर्मांतरण पर होगी कड़ी सजा.. इतने दिन पहले देनी होगी जानकारी, आखिर छत्तीसगढ़ में क्यों लाया गया धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, यहां जानिए डिटेल..