नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली और बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच श्वसन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने प्राचीन योगिक शुद्धिकरण क्रिया ‘जलनेति’ को अपनाने की सलाह दी है। यह योग की षटकर्म क्रियाओं में शामिल एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो नासिका मार्ग की गहराई से सफाई कर श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जलनेति केवल एक घरेलू उपाय नहीं बल्कि सदियों से प्रचलित वैज्ञानिक और प्राकृतिक विधि है। इस प्रक्रिया में कुनकुने नमक मिले पानी को विशेष नेति पॉट की सहायता से एक नथुने से डालकर दूसरे नथुने से बाहर निकाला जाता है।

इससे नाक के अंदर जमा धूल, एलर्जन और प्रदूषक तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिससे सांस लेने में आसानी होती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित रूप से जलनेति करने से साइनस, एलर्जी, जुकाम और नाक बंद होने जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। खासकर महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह क्रिया अत्यंत लाभकारी मानी जाती है, जहां हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। यह न केवल श्वसन मार्ग को साफ करती है बल्कि फेफड़ों तक स्वच्छ वायु पहुंचाने में भी मदद करती है। विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि जलनेति मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

जलनेति के फायदे…

1. नाक और साइनस की गहराई से सफाई

जलनेति नासिका मार्ग में जमी धूल, गंदगी, एलर्जन और प्रदूषक कणों को बाहर निकालने में मदद करती है। इससे साइनस साफ रहते हैं और नाक बंद होने की समस्या में राहत मिलती है।

2. एलर्जी और जुकाम में राहत

जो लोग बार-बार सर्दी, छींक या एलर्जी से परेशान रहते हैं, उनके लिए जलनेति बेहद लाभकारी मानी जाती है। यह नाक की अंदरूनी परत को साफ रखती है, जिससे एलर्जिक रिएक्शन कम हो सकते हैं।

3. सांस लेने में आसानी

प्रदूषित वातावरण में रहने वालों के लिए जलनेति विशेष रूप से उपयोगी है। यह श्वसन मार्ग को साफ कर फेफड़ों तक स्वच्छ हवा पहुंचाने में मदद करती है, जिससे सांस लेना सहज हो जाता है।

4. सिरदर्द और भारीपन से राहत

नाक के मार्ग साफ रहने से सिर में जकड़न और भारीपन कम होता है। नियमित अभ्यास माइग्रेन और साइनस से जुड़े सिरदर्द में भी सहायक हो सकता है।

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By Chhattisgarh Kranti

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