जगदलपुर। बहुचर्चित झीरम घाटी कांड में करीब 13 साल बाद एनआईए की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने मामले में सभी 10 आरोपियों को दोष सिद्ध पाया है। अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़ी लगाई गई धाराओं में आरोपियों को दोषी माना है। दोषी पाए गए 10 आरोपियों में 3 महिलाएं भी शामिल हैं।

झीरम घाटी कांड से जुड़े इस मामले में लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। फैसला आने के साथ ही इस बहुचर्चित मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव आया है। अदालत के निर्णय को लेकर बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की नजरें टिकी हुई थीं।

27 लोगों की हत्या, 15 की हत्या के प्रयास में दोष सिद्ध

अदालत के समक्ष मामले में 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से संबंधित आरोप और धाराएं रखी गई थीं। सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने सभी 10 आरोपियों को इन धाराओं में दोष सिद्ध पाया।

फैसले में आरोपियों की भूमिका को लेकर अदालत का निर्णय सामने आने के बाद अब सजा के प्रावधान को लेकर भी अगली न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

10 आरोपियों में तीन महिलाएं

मामले में दोष सिद्ध किए गए कुल 10 आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। अदालत के फैसले के बाद अब सभी दोषियों को कानून के तहत सजा दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला

गौरतलब है कि 25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के काफिले पर बड़ा नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

घटना के बाद मामले की जांच एनआईए ने की और लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चली। अब करीब 13 साल बाद विशेष एनआईए कोर्ट का फैसला सामने आया है।

झीरम कांड को लेकर अदालत के इस फैसले के बाद बस्तर में एक बार फिर 2013 की उस भयावह घटना की चर्चा तेज हो गई है। अब दोषियों को मिलने वाली सजा पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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By Chhattisgarh Kranti

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