रायपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का नया प्रदेश प्रभारी और सिद्धार्थ शंभू को सह-प्रभारी नियुक्त किए जाने के तुरंत बाद राज्य में सियासी घमासान शुरू हो गया है। 23 सितंबर 2026 को भाजपा द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारियों की देशव्यापी घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस ने स्मृति ईरानी की नियुक्ति को लेकर आक्रामक रुख अपना लिया है। कांग्रेस का पोस्टर वॉर: ‘देश के बाद अब छत्तीसगढ़ की बारी’नियुक्ति की घोषणा के कुछ ही देर भीतर कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक तीखा कार्टून पोस्टर जारी कर भाजपा पर सीधा तंज कसा। इस पोस्टर में कांग्रेस ने लिखा, “बधाई हो अंधभक्तों, देश की जनता को जुमलों से धोखा देने के बाद अब छत्तीसगढ़ की बारी।” पोस्टर के जरिए कांग्रेस ने भाजपा पर ‘जुमलों’ की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए यह भी सवाल उठाया कि जनता को ₹500 में सिलेंडर मिलने के वादे का क्या हुआ? कांग्रेस ने लिखा कि छत्तीसगढ़ की जनता को नए जुमले देने के लिए भाजपा ने यह कदम उठाया है। दीपक बैज का तंज— “स्मृति ईरानी की राह आसान नहीं, सरकार में है मंत्रियों की गोलबंदी”छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने इस नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में स्मृति ईरानी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला है। बैज ने भाजपा के भीतर अंदरूनी कलह और गुटबाजी का दावा करते हुए उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां गिनाईं: मंत्रियों की गोलबंदी: बैज ने दावा किया कि प्रदेश सरकार के भीतर मंत्रियों में भारी नाराजगी है और मुख्यमंत्री के खिलाफ मंत्रियों की गोलबंदी स्मृति ईरानी के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी साबित होगी। वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा: उन्होंने आरोप लगाया कि कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को सरकार से बाहर रखा गया है, जिससे संगठन के भीतर असंतोष का माहौल है। संगठनात्मक गुटबाजी: इस अंदरूनी खींचतान के बीच पूरे संगठन को एक सूत्र में पिरोना स्मृति ईरानी के लिए एक कठिन परीक्षा होगी। भाजपा का नया संगठनात्मक अध्यायगौरतलब है कि भाजपा ने देशभर के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अपने नए प्रभारी और सह-प्रभारियों की सूची जारी की है। इसी फेरबदल के तहत छत्तीसगढ़ के संगठनात्मक कामकाज को मजबूत करने की जिम्मेदारी अब स्मृति ईरानी और सिद्धार्थ शंभू के कंधों पर है। हालाँकि, ये आरोप फिलहाल कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया और उसका अपना आकलन हैं। भाजपा की ओर से इस पर आधिकारिक पलटवार आने के बाद ही प्रदेश के इस नए सियासी अध्याय की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। लेकिन इतना तय है कि स्मृति ईरानी की एंट्री के साथ ही छत्तीसगढ़ की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। Post Views: 4 Please Share With Your Friends Also Post navigation बीरगांव को 110 करोड़ की नई सौगात, 82 करोड़ का STP और नालंदा परिसर; CM साय ने किए बड़े ऐलान छत्तीसगढ़ में ‘किराए पर गरबा पार्टनर’ वाली पोस्ट वायरल, रायपुर समेत कई हिस्सों में भारी विरोध, पुलिस जांच में जुटी