क्या IVF प्रोसेस के दौरान रख रहे हैं व्रत? जान लें आपको अपने डॉक्टर से क्या बात करनी चाहिए

IVF या इन विट्रो फर्टिलाइजेशन ट्रीटमेंट के दौरान फास्टिंग करने से आपकी हेल्थ और प्रोसेस की सफलता को खतरा हो सकता है. हार्मोनल स्टिम्युलेशन, एग रिट्रीवल और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसे स्टेज में लगातार न्यूट्रिशन, दवा का सही समय और सही फ्लूइड बैलेंस यानी हाइड्रेशन की जरूरत होती है. लंबे समय तक फास्टिंग करने से (जो अक्सर त्योहारों से जुड़ा होता है) डिहाइड्रेशन और न्यूट्रिशनल इम्बैलेंस हो सकता है, जिससे IVF के नतीजों पर असर पड़ सकता है. इसलिए, कोई भी फास्ट करने से पहले अपने फर्टिलिटी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

IVF के दौरान फास्टिंग करने पर कोई यूनिवर्सल मेडिकल रोक नहीं है. हालांकि, फास्टिंग करना सही है या नहीं, यह ट्रीटमेंट के खास फेज, पहले से मौजूद हेल्थ कंडीशन और खाने-पीने की चीजों से परहेज के समय जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है. फास्टिंग करने का फैसला करने से पहले आपको इन बातों पर अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से जरूर बात करनी चाहिए…

ओवेरियन स्टिमुलेशन के दौरान हाइड्रेशन क्यों जरूरी है

दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 स्थित बिरला फर्टिलिटी एंड IVF में फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, डॉ. रेखा बरार, का कहना है कि ओवेरियन स्टिमुलेशन में ओवरीज को कई फॉलिकल्स बनाने के लिए प्रेरित करने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं. जैसे-जैसे ओवरीज का साइज बढ़ता है, कुछ मरीजों को पेट फूलने, जी मिचलाने या पेट में बेचैनी महसूस हो सकती है. लंबे समय तक व्रत रखने, खासकर बिना पानी या तरल पदार्थ के, कमजोरी, सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या बढ़ सकती है.

ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) के जोखिम वाले मरीजों के लिए हाइड्रेशन बहुत जरूरी हो जाता है. यह एक ऐसी समस्या है जिसमें ओवरीज की जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया के कारण पेट में फ्लूइड जमा हो सकता है. पेट में सूजन बढ़ना, लगातार उल्टी होना, पेशाब कम आना या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों के लिए तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है.

PMOS, ज्यादा फॉलिकल काउंट या पहले OHSS की समस्या झेल चुकी महिलाओं को अतिरिक्त निगरानी की जरूरत हो सकती है. ऐसी महिलाओं को व्रत रखने का फैसला करते समय अपने व्यक्तिगत जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए.

अगर IVF अपॉइंटमेंट व्रत वाले दिन हो तो क्या करें

डॉ. रेखा बरार का कहना है कि अगर आपकी IVF अपॉइंटमेंट उस दिन है जिस दिन आप व्रत रख रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर या फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लें. IVF ट्रीटमेंट के लिए सही पोषण, ऊर्जा और हार्मोनल संतुलन की जरूरत होती है. इसलिए, डॉक्टर की इजाजत के बिना सख्त व्रत रखना नुकसानदायक हो सकता है.

एग रिट्रीवल आमतौर पर बेहोशी या एनेस्थीसिया देकर किया जाता है. क्लिनिक इस बारे में खास निर्देश देगा कि प्रोसीजर से पहले कब खाना-पीना बंद करना है. ये निर्देश मरीज की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं और इन्हें आम फास्टिंग शेड्यूल से ज्यादा जरूरी माना जाना चाहिए.

दवा के समय का भी उतना ही ध्यान रखना चाहिए. मरीजों को इंजेक्शन में देरी नहीं करनी चाहिए या उसे मिस नहीं करना चाहिए क्योंकि IVF दवा एक तय शेड्यूल के हिसाब से दी जाती है. अगर कोई दवा खाने के साथ लेनी है, या आम रूटीन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है, तो मरीजों को अपने क्लिनिक से पूछना चाहिए कि आगे क्या करना है.

पहले से प्लानिंग करने से मरीजों को अपने डॉक्टरों के साथ मिलकर इलाज और थकान के बीच बेहतर बैलेंस बनाने के लिए काफी समय मिलता है. अगर त्योहारों के दौरान आपके व्रत का समय आपकी दवा या इलाज के शेड्यूल से टकराता है, तो पहले से बातचीत करने से आपको गंभीर हेल्थ रिस्क से बचने में मदद मिल सकती है.

क्या व्रत रखने से भ्रूण के इम्प्लांटेशन पर असर पड़ सकता है?

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद, रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसले भी अहम लग सकते हैं. ऐसे में, मरीज़ों का यह सोचना स्वाभाविक है कि क्या व्रत रखने से इम्प्लांटेशन या प्रेग्नेंसी की संभावनाओं पर कोई असर पड़ सकता है.

डॉ. रेखा बरार का कहना है कि IVF ट्रीटमेंट के दौरान व्रत रखने के असर के बारे में कोई तय नियम नहीं है, क्योंकि इस विषय पर पर्याप्त वैज्ञानिक सबूत मौजूद नहीं हैं. इसलिए, यह मान लेना गलत होगा कि व्रत रखना पूरी तरह सुरक्षित है या इससे एम्ब्रियो इम्प्लांटेशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. डॉक्टर के अनुसार, व्रत रखने का फैसला सुरक्षित है या नहीं, यह तय करने के लिए कई बातों पर ध्यान देना जरूरी है, जैसे मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, ट्रीटमेंट का चरण, लक्षण और सही पोषण और हाइड्रेशन बनाए रखने की क्षमता आदि.

‘दो हफ्ते के इंतजार’ (two-week wait) के दौरान, मरीजों को लंबे समय तक व्रत रखने (खासकर ऐसे व्रत जिनमें पानी भी नहीं पिया जाता) से पहले अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. TWW वह समय है जब महिला एम्ब्रियो ट्रांसफर या ओव्यूलेशन के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट के नतीजों का इंतजार करती है. इस दौरान बिना पानी के लंबा उपवास या बहुत कड़ा उपवास रखना नुकसानदायक हो सकता है.

इलाज करवा रही महिलाओं को दूसरे मरीजों के अनुभव या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, क्योंकि उनके इलाज की परिस्थितियां काफी अलग हो सकती हैं.

इस दौरान मरीज त्योहारों की परंपराओं को सुरक्षित रूप से कैसे मना सकते हैं?

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान खास देखभाल, सही खान-पान और समय पर दवा लेने की जरूरत होती है. इसलिए, किसी भी तरह का व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है. मरीजों को अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट के साथ व्रत की योजना, दवा का शेड्यूल और होने वाले प्रोसीजर के बारे में पहले से बात करनी चाहिए, जैसे कि यह पता करने के लिए कि अगर पूरा व्रत रखना सही नहीं है, तो क्या व्रत का कोई बदला हुआ तरीका अपनाया जा सकता है. व्रत के दौरान डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नियमित रूप से पानी, नारियल पानी या छाछ पीते रहना चाहिए. यह भी पूछना जरूरी है कि क्या निर्जला व्रत से बचना चाहिए,

यह फैसला आखिरी समय पर या डर की वजह से नहीं लेना चाहिए. त्योहारों के दौरान व्रत रखने का समय शुरू होने से पहले इस बारे में बात करने से मरीजों को अपने ट्रीटमेंट को बेहतर ढंग से समझने और मेडिकल गाइडलाइंस का पालन करते हुए व्रत रखने का तरीका तय करने में मदद मिल सकती है.

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By Chhattisgarh Kranti

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