नई दिल्ली। ज्येष्ठ पूर्णिमा के महास्नान के बाद बीमार चल रहे महाप्रभु जगन्नाथ के स्वास्थ्य में अब सुधार हो रहा है। 15 दिनों के कड़े एकांतवास और विशेष जड़ी-बूटियों के उपचार के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए तैयार हो रहे हैं। पुरी के विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के कपाट आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से ठीक एक दिन पहले नवयौवन दर्शन के लिए खोले जाएंगे। इसके ठीक अगले दिन यानी 16 जुलाई 2026 को महाप्रभु अपने प्रसिद्ध रथ यात्रा पर निकलेंगे, जिसके लिए सिंहद्वार के सामने तीन विशाल रथ बनकर पूरी तरह तैयार हैं। महास्नान के बाद क्यों बंद हुए सिंहद्वार के कपाट? परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को मंदिर के स्नान वेदी पर लाया गया था। यहाँ कुएं के 108 कलशों के पवित्र जल से महाप्रभु का देव स्नान कराया गया। धार्मिक मान्यता है कि दिनभर चले इस महास्नान के कारण भगवान को तेज बुखार आ गया। इसके तुरंत बाद उन्हें गर्भगृह के ‘अनासर घर’ (एकांतवास कक्ष) में स्थापित कर दिया गया और मंदिर के मुख्य कपाट आम भक्तों के लिए बंद कर दिए गए। इस 15 दिनों की अवधि के दौरान भगवान को केवल ‘ओसुआ’ (विशेष आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का काढ़ा) और गुप्त भोग लगाया जाता है। इस दौरान मंदिर के सेवायत पुजारी ही वैद्य की भूमिका में महाप्रभु की सेवा और उपचार करते हैं। इस बीच भक्तों के लिए भगवान के दर्शन पूरी तरह वर्जित रहते हैं। इस दिन स्वस्थ होकर दर्शन देंगे महाप्रभु जगन्नाथ वैद्यों के उपचार के बाद भगवान अब पूरी तरह स्वस्थ माने जा रहे हैं। रथ यात्रा शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, भगवान जगन्नाथ अपने दिव्य नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसी दिन भक्तों के लिए मंदिर के कपाट दोबारा खोले जाएंगे। इस दर्शन को ‘नेत्रोत्सव’ भी कहा जाता है, जिसे देखने के लिए पुरी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटने शुरू हो गए हैं। रथ यात्रा 2026: 16 जुलाई से 24 जुलाई तक का पूरा शेड्यूल पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का प्रारंभ 15 जुलाई को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा, जो 16 जुलाई को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक चलेगी। उदयातिथि के नियमों के तहत जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू होगी। 15 जुलाई 2026: महाप्रभु का नवयौवन दर्शन (नेत्रोत्सव)। 16 जुलाई 2026: रथ यात्रा का भव्य शुभारंभ। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। 24 जुलाई 2026: बहुदा यात्रा (उल्टा रथ)। इस दिन भगवान अपने मुख्य मंदिर लौटेंगे और उत्सव संपन्न होगा। बिना जानवरों के खिंचते हैं ये विशाल रथ, सोने की झाड़ू से साफ होता है रास्ता पुरी की रथ यात्रा से जुड़ी कई अनूठी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ ‘नंदीघोष’, बलभद्र के रथ ‘तालध्वज’ और सुभद्रा के रथ ‘दर्पदलन’ को खींचने के लिए किसी भी घोड़े, हाथी या अन्य जानवर का उपयोग नहीं किया जाता। इन भारी-भरकम लकड़ी के रथों को केवल भक्तों के सैलाब द्वारा मोटे रस्सों की मदद से खींचा जाता है। इसके अलावा, रथ यात्रा की शुरुआत से पहले ‘छेरा पहरा’ की रस्म निभाई जाती है। इसके तहत पुरी के गजपति महाराज (शाही वंशज) खुद एक सेवक के रूप में आते हैं और सोने की झाड़ू (कनक बुहनी) से रथों के मार्ग और पवित्र चबूतरे की सफाई करते हैं। यह रस्म दर्शाती है कि भगवान के सामने राजा और रंक सब समान हैं। श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइन और रूट डायवर्जन ओडिशा प्रशासन ने 16 जुलाई को होने वाली मुख्य रथ यात्रा के मद्देनजर पुरी शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। भुवनेश्वर और कटक की ओर से आने वाले वाहनों के लिए मालतीपातपुर के पास विशेष पार्किंग जोन बनाए गए हैं। ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर केवल पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति होगी। प्रशासन ने उमड़ती भीड़ को देखते हुए जगह-जगह मेडिकल कैंप और पेयजल के काउंटर स्थापित किए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। Post Views: 19 Please Share With Your Friends Also Post navigation राहुल गांधी का सचिव बताकर किया कॉल, फिर इन बड़े नेताओं के साथ हो गया खेला, लगा लाखों का चूना