दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षकों की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को दो महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य में विशेष शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत को बताया गया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

3981 शिक्षकों की जरूरत, स्वीकृत पद केवल 848

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि राज्य में विशेष बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए करीब 3981 विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है। इसके विपरीत सरकार ने अब तक केवल 848 पद ही स्वीकृत किए हैं। इससे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में समावेशी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उचित शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

स्क्रीनिंग के बाद होगी नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट ने 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) और 85 विशेष शिक्षकों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति पर जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जो अभ्यर्थी निर्धारित मापदंडों पर योग्य पाए जाएं, उनकी भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि विशेष बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

जुलाई 2026 में देनी होगी रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम Court ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया और उठाए गए कदमों की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट जुलाई 2026 में अदालत के समक्ष पेश की जाए। अदालत ने संकेत दिए कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई पूरी नहीं हुई, तो सरकार को जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।

समावेशी शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

विशेष शिक्षकों की कमी का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है। शिक्षा से जुड़े संगठनों और अभिभावकों का कहना है कि प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई स्कूलों में ऐसे बच्चों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग नहीं मिल पा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति बेहद जरूरी है। इससे न केवल बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।

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By Chhattisgarh Kranti

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