बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि थानों में सिर्फ सीसीटीवी कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कैमरे हर समय चालू और रिकॉर्डिंग सिस्टम दुरुस्त रहना चाहिए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट नहीं होना चाहिए। यदि लापरवाही के चलते महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं रहती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। गौरेला थाने की CCTV फुटेज का मामला दरअसल, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के गौरेला थाने में नशे के कारोबार से जुड़े मामले के एक आरोपी सहित चार आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि घटना से एक दिन पहले ही पुलिस ने उन्हें थाने में बैठा लिया था। अपने दावे की पुष्टि के लिए आरोपियों ने 13 से 15 सितंबर 2024 के बीच थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल सीडीआर और टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की मांग की थी। ट्रायल कोर्ट में पुलिस की ओर से बताया गया कि सीसीटीवी सिस्टम में 18 महीने की स्टोरेज अवधि पूरी हो जाने के कारण संबंधित फुटेज ऑटोमेटिक रूप से डिलीट हो चुकी है। मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब संबंधित फुटेज उपलब्ध ही नहीं है, तो उसे पेश करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों की याचिका खारिज कर दी। CCTV सिस्टम पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के उद्देश्य पर भी जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी सिस्टम का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। साथ ही इससे नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा होती है। कोर्ट ने साफ किया कि सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कैमरों को स्थापित करना। तकनीकी खराबी, प्रशासनिक लापरवाही या किसी अन्य कारण से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट नहीं होने चाहिए। 550 थानों में 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के 550 पुलिस थानों में सीसीटीवी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम किया जा रहा है। सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी लेना सरकार ने बताया कि जिला स्तरीय निगरानी समितियों द्वारा प्रत्येक महीने पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी सिस्टम की जांच की जाएगी। इसके अलावा 18 महीने की रिकॉर्डिंग का बैकअप सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। शासन की ओर से इस संबंध में की गई व्यवस्था और कार्रवाई की रिपोर्ट भी हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। मुख्य सचिव और DGP को भेजा जाएगा आदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के निर्देशों के बाद अब प्रदेश के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। Post Views: 13 Please Share With Your Friends Also Post navigation बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता जैविक-पिता, DNA जांच में साबित हुए बेटे को 5000 महीना देने हाईकोर्ट का आदेश