गरियाबंद। बीते सप्ताह हुई मूसलाधार बारिश के बाद पैरी नदी में आई बाढ़ ने गरियाबंद जिले के किसानों पर भारी तबाही मचा दी है। कोपरा और तर्रा गांव में नदी का तटबंध टूटने से बाढ़ का पानी सीधे खेतों में घुस गया, जिससे 150 एकड़ से अधिक कृषि भूमि बर्बाद हो गई। धान की लहलहाती फसल तो नष्ट हुई ही, कई खेतों पर कई फीट मोटी रेत की परत जम गई है। 29-30 जुलाई की बारिश बनी आफत 29 और 30 जुलाई को हुई लगातार भारी बारिश के कारण पैरी नदी उफान पर आ गई। तेज बहाव ने तटबंध को तोड़ दिया और बाढ़ का पानी आसपास के खेतों में फैल गया। पानी उतरने के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने किसानों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। जहां कुछ दिन पहले तक धान की हरियाली नजर आ रही थी, वहां अब दूर-दूर तक केवल रेत ही रेत दिखाई दे रही है। “खेत पहचानना मुश्किल हो गया” प्रभावित किसानों का कहना है कि बाढ़ ने केवल फसल ही नहीं, बल्कि खेतों की पहचान भी मिटा दी है। उपजाऊ मिट्टी बह जाने से कई खेत पूरी तरह रेत से ढक गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, “खेती ही हमारे परिवार का एकमात्र सहारा थी। अब फसल भी खत्म हो गई और खेत भी खेती लायक नहीं बचे।” रोजी-रोटी पर गहराया संकट किसानों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इस सीजन की पूरी फसल बर्बाद होने के साथ-साथ भविष्य में खेती करना भी चुनौती बन गया है। कई किसानों का कहना है कि यदि खेतों से रेत नहीं हटाई गई तो आने वाले वर्षों तक खेती संभव नहीं होगी। प्रशासन से मदद की मांग कोपरा और तर्रा के किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत देने की मांग की है। किसानों की प्रमुख मांगें हैं— फसल क्षति का तत्काल सर्वे कराया जाए। प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। खेतों से रेत हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। पैरी नदी के टूटे तटबंध का स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी तबाही दोबारा न हो। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द सर्वे कर राहत और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। Post Views: 14 Please Share With Your Friends Also Post navigation शिक्षा विभाग ने की बड़ी कार्रवाई: स्कूल में शराब पार्टी का वीडियो वायरल होने पर JD ने दो शिक्षकों को किया निलंबित….