रायपुर : छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा में बड़े बदलाव की शुरुआत होने जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र से इंजीनियरिंग के छात्र न केवल तकनीकी विषयों की पढ़ाई करेंगे, बल्कि श्रीमद्भगवद्गीता, प्राचीन भारतीय गणित, खगोल विज्ञान, भारतीय संस्कृति और संविधान जैसे विषयों का भी अध्ययन करेंगे। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत उठाया गया है, जिसका लक्ष्य छात्रों को न केवल कुशल इंजीनियर, बल्कि जिम्मेदार और संस्कारित नागरिक बनाना है।

नए सिलेबस में क्या होगा खास?

छत्तीसगढ़ के 28 इंजीनियरिंग कॉलेजों में लागू होने वाले नए सिलेबस में कई नवाचार शामिल किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पुराने विषयों का कंटेंट अपडेट किया गया है और चार नए विषय जोड़े गए हैं।

फर्स्ट सेमेस्टर: फाउंडेशन कोर्स ऑफ एंसिएंट इंडियन नॉलेज सिस्टम – इसमें प्राचीन भारतीय गणितज्ञों जैसे आर्यभट्ट, वराहमिहिर और ब्रह्मगुप्त के योगदान को पढ़ाया जाएगा।
सेकंड सेमेस्टर: श्रीमद्भगवद्गीता – मैनुअल ऑफ लाइफ एंड यूनिवर्स, जिसमें जीवन और ब्रह्मांड के दार्शनिक पहलुओं पर जोर दिया जाएगा।
थर्ड सेमेस्टर: इंडियन ट्रेडिशनल नॉलेज साइंस एंड प्रैक्टिसेस – इसमें खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनॉमी) और ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) के चैप्टर शामिल होंगे।
फोर्थ सेमेस्टर: इंडियन कल्चर एंड कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया – इसमें कलिंग, मराठा, राजपूत और द्रविड़ स्थापत्य कला के साथ-साथ भारतीय संविधान की पढ़ाई होगी। ये विषय सभी ब्रांच के छात्रों के लिए अनिवार्य होंगे, चाहे वे सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे हों।

फिजिक्स में ब्रांच के अनुसार पढ़ाई-

पहले सभी ब्रांच के छात्र एकसमान फिजिक्स पढ़ते थे, लेकिन अब ब्रांच के आधार पर फिजिक्स का सिलेबस अलग होगा। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए अलग-अलग फिजिक्स की किताबें होंगी। इसके अलावा, स्किल आधारित विषयों को भी जोड़ा गया है, जैसे मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित कोर्स।

मल्टीपल एंट्री और एक्जिट का प्रावधान- 

नई नीति के तहत बीटेक कोर्स में मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एक्जिट की सुविधा दी गई है। अब छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ने के बाद उसी स्तर से कोर्स दोबारा शुरू कर सकेंगे। साथ ही 1 साल पूरा करने पर सर्टिफिकेट, 2 साल पूरा करने पर डिप्लोमा, 4 साल पूरा करने पर बीटेक की डिग्री प्रदान की जाएगी।

शिक्षा में भारतीय संस्कृति का समावेश-

नए सिलेबस में भारतीय संस्कृति और परंपराओं को विशेष महत्व दिया गया है। प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली के तहत छात्रों को आर्यभट्ट, वराहमिहिर जैसे गणितज्ञों के कार्यों और भारतीय स्थापत्य कला की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से नैतिकता और जीवन मूल्यों को समझाया जाएगा। संविधान की पढ़ाई से छात्रों को देश के कानूनी ढांचे और नागरिक जिम्मेदारियों की जानकारी मिलेगी।

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By Chhattisgarh Kranti

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