BIG NEWS : हाथरस जिले में दहेज की मांग के खिलाफ दो सगी बहनों ने साहसिक कदम उठाते हुए अपनी शादी तोड़ दी और बारात को बिना दुल्हन के वापस लौटा दिया। यह घटना सादाबाद तहसील के समदपुर गांव में 14 अप्रैल 2025 को हुई, जहां शिवानी और भारती नाम की दो बहनों की शादी ताजपुर गांव के दो सगे भाइयों, मोहित और नारायण, के साथ तय थी। दहेज में कार की मांग और मारपीट के बाद दोनों बहनों ने शादी से इनकार कर दिया, जिससे क्षेत्र में उनकी हिम्मत की चर्चा हो रही है।

क्या है पूरा मामला?

सादाबाद क्षेत्र के एक मैरिज लॉन में सोमवार रात को दो सगी बहनों की शादी का समारोह धूमधाम से चल रहा था। बारात ताजपुर से बिसावर के एक गेस्ट हाउस में पहुंची थी। लड़की पक्ष ने बारातियों का स्वागत किया, और चढ़त की रस्में शुरू हो चुकी थीं। लड़कियों के पिता सुनील ने पहले ही तयशुदा 6 लाख रुपये नकद और अन्य सामान दहेज में दे दिया था। लेकिन, जैसे ही वरमाला की रस्म शुरू होने वाली थी, दूल्हे के परिजनों ने अचानक दहेज में कार की मांग रख दी।

लड़की पक्ष ने अतिरिक्त मांग पूरी करने में असमर्थता जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि बात मारपीट तक पहुंच गई। दूल्हे पक्ष के लोगों ने लड़की पक्ष के परिवार, जिसमें दुल्हनों के भाई मौसम को भी चोटें आईं, के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की। बहनों का आरोप है कि दूल्हे के भाइयों ने उनकी 7 साल की छोटी बहन के हाथ में भी चोट पहुंचाई।

बहनों ने दिखाई हिम्मत

मारपीट और दहेज की मांग से आक्रोशित शिवानी और भारती ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। दुल्हन के जोड़े में सजी दोनों बहनें अपने परिवार के साथ सादाबाद कोतवाली पहुंचीं और दहेज लोभियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिवानी ने कहा, “पापा ने 6 लाख रुपये और सारा सामान पहले ही दे दिया था। बारात आने के बाद भी ये लोग कार मांगने लगे। हम ऐसे लोगों के साथ शादी नहीं करेंगे।” पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।

अंततः दोनों दूल्हों को बिना शादी के बारात लेकर वापस लौटना पड़ा। लड़की पक्ष ने महिला थाने में तहरीर दी, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। क्षेत्राधिकारी हिमांशु कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

कानूनी प्रावधान

भारत में दहेज लेना, देना, या मांगना ‘दहेज निषेध अधिनियम, 1961’ के तहत अपराध है। दहेज मांगने पर 5 साल तक की जेल और कम से कम 15,000 रुपये का जुर्माना या दहेज की राशि के बराबर जुर्माना हो सकता है। यदि दहेज के लिए प्रताड़ना की जाती है, तो 3 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। दहेज के कारण 7 साल के भीतर महिला की अस्वाभाविक मृत्यु होने पर इसे दहेज हत्या माना जाता है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।

सामाजिक संदेश

इस घटना ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। सोशल मीडिया पर भी दोनों बहनों की हिम्मत की सराहना हो रही है। एक यूजर ने लिखा, “ये सिर्फ शादी नहीं टूटी, दहेज प्रथा की जड़ों पर चोट हुई है।” यह घटना समाज को दहेज के खिलाफ जागरूक करने और महिलाओं को अपने हक के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है, और यह घटना दहेज जैसी कुप्रथा को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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By Chhattisgarh Kranti

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