रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की TET अनिवार्यता को लेकर चल रही उठापटक के बीच शिक्षा विभाग की अहम बैठक से एक तरफ राहत की उम्मीद जगी है, तो दूसरी तरफ प्रमोशन को लेकर शिक्षकों की चिंता कम नहीं हुई है। बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार की मंशा साफ करते हुए कहा कि इस मामले में विकल्प तलाशे जा रहे हैं। खास बात यह रही कि बैठक के तय एजेंडे में TET का मुद्दा शामिल नहीं था। इसके बावजूद मंत्री ने खुद इस विषय को उठाया और अधिकारियों के सामने सरकार का पक्ष रखा। इससे यह संकेत मिला कि सरकार TET के कारण प्रभावित हो रहे शिक्षकों की समस्या को गंभीरता से ले रही है। हालांकि, प्रमोशन में TET की अनिवार्यता खत्म करने को लेकर बैठक में कोई फैसला नहीं हुआ। ऐसे में शिक्षकों को सेवा सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार से सकारात्मक संकेत तो मिले हैं, लेकिन पदोन्नति के मामले में फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है। विभागीय TET का विकल्प बन सकता है राहत का रास्ता शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार TET को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इस सिलसिले में शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह मध्यप्रदेश के अधिकारियों के संपर्क में हैं। सरकार विशेष रूप से ऐसे शिक्षकों के लिए विभागीय TET परीक्षा के विकल्प पर नजर रख रही है, जो लंबे समय से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। यदि इस तरह की व्यवस्था लागू होती है तो शिक्षकों को सामान्य TET परीक्षा की तुलना में राहत मिल सकती है। मंत्री के बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि सरकार इस समस्या को केवल नियमों के स्तर पर नहीं, बल्कि शिक्षकों की उम्र और लंबे सेवा अनुभव को ध्यान में रखकर देख रही है। 1998 बैच का उदाहरण देकर बताई मुश्किल बैठक में शिक्षकों की वास्तविक परेशानी को सामने रखते हुए मंत्री गजेंद्र यादव ने 1998 बैच के शिक्षक का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि करीब तीन दशक से सेवा दे रहे किसी शिक्षक के लिए वर्तमान समय में सामान्य TET की तैयारी करना और परीक्षा पास करना आसान नहीं होगा। ऐसे शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर परीक्षा का विकल्प ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश में भी विभागीय परीक्षा को लेकर चल रही प्रक्रिया पर छत्तीसगढ़ सरकार नजर बनाए हुए है। यदि मध्यप्रदेश में विभागीय TET को लेकर कोई व्यवस्था बनती है, तो छत्तीसगढ़ सरकार भी उस व्यवस्था का अध्ययन कर अपने राज्य में इसे लागू करने पर विचार कर सकती है। TET एजेंडे में नहीं, फिर भी मंत्री ने खुद उठाया मुद्दा बैठक की एक अहम बात यह रही कि TET निर्धारित एजेंडे का हिस्सा नहीं था, लेकिन इसके बावजूद शिक्षा मंत्री ने इस विषय पर अधिकारियों के सामने सरकार की सोच रखी। मंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि शिक्षा विभाग में सुधार के लिए सरकार जहां जरूरी है वहां सख्ती करेगी, वहीं लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के हितों की भी अनदेखी नहीं की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में अनावश्यक दबाव का सामना न करना पड़े। सेवा सुरक्षा पर उम्मीद, प्रमोशन पर अभी भी सवाल TET को लेकर सरकार के रुख से शिक्षकों को सबसे बड़ी उम्मीद सेवा सुरक्षा के मोर्चे पर मिली है। विभागीय परीक्षा या दूसरे विकल्पों पर विचार होने की बात सामने आने के बाद लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को कुछ राहत की उम्मीद बंधी है। लेकिन प्रमोशन का मामला अभी भी उलझा हुआ है। शिक्षकों की प्रमुख चिंता यह है कि क्या पदोन्नति के लिए भी TET अनिवार्य रहेगा? बैठक में इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। न ही प्रमोशन में TET से छूट को लेकर कोई निर्णय घोषित किया गया। इसलिए फिलहाल यह माना जा रहा है कि पदोन्नति की प्रक्रिया मौजूदा नियमों के तहत ही आगे बढ़ेगी। जब तक सरकार की ओर से अलग से कोई आदेश जारी नहीं होता, तब तक शिक्षकों को प्रमोशन में TET की बाध्यता से राहत मिलने की उम्मीद पूरी नहीं हुई है। व्याख्याता प्रमोशन जल्द, प्राचार्यों को उप संचालक बनाने की तैयारी बैठक में शिक्षा मंत्री ने पदोन्नति को लेकर एक और महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि व्याख्याताओं की पदोन्नति जल्द की जाएगी। इसके अलावा कुछ प्राचार्यों को उप संचालक के पद पर पदोन्नत करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि इन पदोन्नतियों में TET की शर्त किस तरह लागू होगी, इस पर मंत्री की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यही वजह है कि प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों की नजर अब विभाग के अगले आदेश पर है। शिक्षा की गुणवत्ता पर सरकार का फोकस बैठक में शिक्षा व्यवस्था के दूसरे पहलुओं पर भी अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए। शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही विद्यार्थियों और स्कूलों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी और स्कूल स्तर पर बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। फिलहाल तस्वीर क्या है? कुल मिलाकर शिक्षा विभाग की बैठक से TET को लेकर सेवा सुरक्षा के मामले में सरकार का रुख पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट हुआ है। विभागीय TET समेत दूसरे विकल्पों पर विचार किए जाने से शिक्षकों को राहत की उम्मीद जरूर मिली है। लेकिन प्रमोशन में TET की अनिवार्यता पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। यही वह मुद्दा है जिस पर शिक्षकों की निगाहें अब भी टिकी हुई हैं। सरकार के अगले आदेश से ही यह स्पष्ट होगा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को पदोन्नति के मोर्चे पर भी राहत मिलती है या नहीं। Post Views: 121 Please Share With Your Friends Also Post navigation पशु क्रूरता मामले में बड़ी कार्रवाई : आरोपी पिता-पुत्र गिरफ्तार, पंचायत सचिव निलंबित…. छत्तीसगढ़ में स्कूलों के समय में होगा बदलाव, शनिवार को मॉर्निंग की जगह डे शिफ्ट