रायपुर। घाटबर्रा गांव के ग्रामीणों के सामुदायिक वन अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर बड़ा अपडेट आया है। कोर्ट ने केंद्र, छत्तीसगढ़ सरकार, राजस्थान की बिजली कंपनी RRVUNL और सरगुजा की जिला स्तरीय वन अधिकार समिति को नोटिस जारी किया है। लेकिन साथ ही कोर्ट ने साफ कर दिया कि इस याचिका की सुनवाई का PEKB कोयला ब्लॉक में चल रहे खनन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट अब यह जांच करेगा कि घाटबर्रा के ग्रामीणों के सामुदायिक वन अधिकार कानूनी तौर पर मौजूद हैं या नहीं। अगर अधिकार स्थापित होते हैं तो उन्हें लागू कराने के संभावित कानूनी रास्तों पर विचार किया जाएगा। दरअसल, ‘हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति’ और छह अन्य याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 21 अप्रैल के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने सामुदायिक वन अधिकारों और PEKB के दूसरे चरण के खनन से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। ग्रामीणों का तर्क है कि वन अधिकार कानून के तहत उनके अधिकारों को खत्म करना और वन भूमि का खनन के लिए डायवर्जन ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। Post Views: 40 Please Share With Your Friends Also Post navigation 111 उप अभियंताओं की नियुक्ति, 15 दिन के भीतर ज्वाइनिंग के आदेश नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर वारदात का आरोप…