अंबिकापुर। सरगुजा में इन दिनों चल रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता T. S. Singh Deo ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए प्रशासनिक कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई नियम और कानून के तहत होनी चाहिए, न कि किसी की व्यक्तिगत इच्छा या मनमर्जी से। सिंहदेव ने कहा कि अवैध निर्माण या अतिक्रमण को हटाना प्रशासन का अधिकार है, लेकिन सरकार का पहला दायित्व गरीबों के लिए रहने की उचित व्यवस्था करना भी होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “गरीबी के नाम पर कानून नहीं तोड़ा जा सकता, लेकिन गरीबों को केवल कार्रवाई का शिकार बनाना भी उचित नहीं है।” पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा कि जिले के कलेक्टर और प्रशासन के पास कई वैकल्पिक रास्ते होते हैं। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में या परिस्थितियों के कारण कहीं घर बना लेता है, तो प्रशासन को पहले समाधान और पुनर्वास के विकल्प तलाशने चाहिए। केवल बुलडोजर चलाकर लोगों को बेघर कर देना संवेदनशील प्रशासनिक रवैया नहीं माना जा सकता। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई अवैध निर्माण होता है तो उसमें सिर्फ घर बनाने वाला व्यक्ति ही जिम्मेदार नहीं होता। कई बार अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और जमीन बेचने वालों की भूमिका भी सामने आती है। ऐसे में कार्रवाई केवल गरीब और कमजोर वर्ग पर ही क्यों की जाती है। सिंहदेव ने कहा कि “घर बनाने वाले गरीब व्यक्ति के ऊपर ही बुलडोजर चलता है, लेकिन जिसने जमीन बेची, जिसने निर्माण होने दिया, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी में यह सब हुआ, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती?” उन्होंने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार सभी जिम्मेदार लोगों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक आम नागरिक जब जमीन खरीदकर घर बनाता है तो उसे यह भरोसा होता है कि सरकार, प्रशासन और संबंधित विभाग सब कुछ देख रहे हैं। ऐसे में यदि बाद में निर्माण को अवैध बताकर तोड़ दिया जाता है, तो सबसे ज्यादा नुकसान उस गरीब परिवार को होता है जिसने जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर आशियाना बनाया होता है। अंबिकापुर में हाल के दिनों में प्रशासन द्वारा अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान कई जगहों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई है, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे कानून व्यवस्था और सरकारी जमीन बचाने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं कई लोग गरीब परिवारों पर हो रही कार्रवाई को लेकर चिंता जता रहे हैं।टीएस सिंहदेव के बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मानवीय संवेदनाओं और कानूनी प्रक्रिया दोनों को ध्यान में रखकर की जाए। Post Views: 19 Please Share With Your Friends Also Post navigation सरगुजा की पहाड़ी कोरवा बस्तियों में 113 हैंडपंप-बोरवेल खुदेंगे, CM के निर्देश पर एक महीने में पूरा होगा काम