गरियाबंद। जिले के फिंगेश्वर विकासखंड में शिक्षा विभाग से जुड़ा कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि परीक्षा परिणाम और फर्द (दस्तावेज) तैयार करने के नाम पर शासकीय और निजी स्कूलों से राशि वसूली गई। इस पूरे मामले को तब तूल मिला, जब फोनपे के माध्यम से किए गए भुगतान और कथित आदेशों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। सूत्रों के अनुसार, फिंगेश्वर ब्लॉक के करीब 157 शासकीय प्राथमिक और 83 मिडिल स्कूलों से 150 से 300 रुपये तक की राशि ली गई। इसके अलावा कुछ निजी स्कूलों से भी अलग से वसूली किए जाने की बात सामने आई है। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वायरल स्क्रीनशॉट्स में कई अहम बातें सामने आई हैं। इनमें फोनपे ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे जमा कराने के प्रमाण, व्हाट्सऐप के माध्यम से जारी कथित आदेश या सूचना, और उन मोबाइल नंबरों की जानकारी शामिल है, जिन पर पैसे ट्रांसफर किए गए। इन डिजिटल साक्ष्यों के सामने आने के बाद अब यह मामला महज आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच के लिए ठोस आधार बन चुका है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस तरह की वसूली के लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया, तो फिर यह निर्देश किसने जारी किए? स्कूलों को फोन कर पैसे जमा कराने के लिए किसने कहा? फोनपे पर जिस नंबर में राशि जमा हुई, वह किसका है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं? क्या यह एक संगठित तरीके से किया गया कृत्य है? शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब शासन द्वारा परीक्षा और अन्य शैक्षणिक कार्यों के लिए पहले से ही बजट उपलब्ध कराया जाता है, तो फिर इस तरह की अलग से वसूली पूरी तरह नियम विरुद्ध है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला गंभीर मामला बताया है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) गरियाबंद ने स्पष्ट किया है कि विभाग की ओर से इस तरह की किसी भी वसूली का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में इस तरह की गतिविधियां सामने आती हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले के सामने आने के बाद अब शिक्षकों, अभिभावकों और आम लोगों की ओर से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। Post Views: 16 Please Share With Your Friends Also Post navigation 3 महीने तक छुट्टियों पर ब्रेक: बिना मंजूरी अवकाश लिया तो एक्शन, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश VIP रोड के करेंसी टावर में अफरा-तफरी: लिफ्ट फेल होने से कांग्रेस नेता फंसे, इमरजेंसी सिस्टम भी बेकार