नई दिल्ली। शरीर के भीतर वेस्ट प्रोडक्ट्स (अपशिष्ट पदार्थों) को छानने वाली मशीन यानी किडनी अगर ठीक से काम न करे, तो यह पूरे शरीर के लिए घातक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी की बीमारियों का सबसे डरावना पहलू यह है कि इसके 80 से 90 प्रतिशत लक्षण तब तक सामने नहीं आते जब तक अंग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त न हो जाए। इसी कारण चिकित्सा जगत में इसे ‘साइलेंट किलर’ की संज्ञा दी गई है।

बीमारी का ‘साइलेंट’ होना ही सबसे बड़ा खतरा

किडनी हमारे रक्त से विषाक्त पदार्थों को अलग कर पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। जब किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है, तो शरीर के अन्य हिस्से शुरुआती दौर में इसकी भरपाई करने की कोशिश करते हैं। यथार्थ सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के विशेषज्ञों के अनुसार, मरीज को तब तक थकान या दर्द महसूस नहीं होता जब तक किडनी का बड़ा हिस्सा काम करना बंद न कर दे। अक्सर लोग सामान्य सूजन या थकान को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) का रूप ले लेती है।

विशेषज्ञ की राय: डॉ. का विश्लेषण

किडनी की कार्यप्रणाली और इसके गुप्त खतरों को समझने के लिए हमने स्थानीय विशेषज्ञ से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच ही एकमात्र बचाव है।

“किडनी की बीमारियां अक्सर तब तक पकड़ में नहीं आतीं जब तक वे गंभीर रूप न ले लें। इसका मुख्य कारण यह है कि किडनी में ‘रिजर्व कैपेसिटी’ बहुत अधिक होती है। जब तक किडनी 60-70% तक खराब नहीं हो जाती, तब तक शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर सामान्य दिख सकता है। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों को फरीदाबाद जैसे शहरी इलाकों में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।”— डॉ. ऋितेष शर्मा, चेयरमैन, नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, यथार्थ सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

हालांकि इसे साइलेंट किलर कहा जाता है, लेकिन शरीर कुछ सूक्ष्म संकेत जरूर देता है जिन्हें पहचानना जरूरी है:

  • टखनों और आंखों के नीचे सूजन: सुबह के वक्त चेहरे या पैरों में भारीपन महसूस होना।
  • पेशाब में बदलाव: रात में बार-बार पेशाब आना या पेशाब में झाग का दिखना।
  • भूख में कमी और कमजोरी: बिना किसी भारी काम के लगातार थकान महसूस होना।
  • अनियंत्रित रक्तचाप: अचानक बीपी का बढ़ना किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है।

नागरिकों के लिए सुझाव और अगला कदम

फरीदाबाद के निवासियों, विशेषकर सेक्टर 15, 16 और एनआईटी जैसे क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों और मधुमेह रोगियों को सलाह दी जाती है कि वे साल में कम से कम एक बार KFT (Kidney Function Test) और यूरिन रूटीन जांच जरूर करवाएं। शहर के प्रदूषण और बदलती जीवनशैली के बीच, पर्याप्त पानी पीना और नमक का सेवन कम करना आपकी किडनी की उम्र बढ़ा सकता है।

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By Chhattisgarh Kranti

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