नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र में आज एक बेहद महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक 2026 पर बड़ी बहस होने जा रही है। सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए इस अहम और कड़े बिल को सदन में पेश किया था। हालांकि सोमवार को विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा था। आज लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सीधे दखल के बाद दोपहर 12 बजे से इस नए और सख्त कानून पर विस्तार से चर्चा शुरू होगी। इस अहम बिल पर सरकार की ओर से सदन में लगभग 8 से 10 घंटे तक बहुत ही गहन और लंबी चर्चा होने की मजबूत संभावना है। सत्ताधारी एनडीए ने इस महत्वपूर्ण बहस में अपने कई युवा सांसदों को प्रमुखता से आगे करने की एक बहुत ही स्पष्ट रणनीति बनाई है भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या जैसे मुखर युवा सांसद सदन में इस चर्चा के दौरान प्रमुखता से हिस्सा लेंगे। इसके अलावा आज नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी पहली बार प्रश्नकाल में शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सभी अहम सवालों का जवाब देंगे। बिल में हैं बेहद सख्त प्रावधानयह नया संशोधन विधेयक मुख्य रूप से साल 2024 में बनाए गए पब्लिक एग्जामिनेशन कानून को और ज्यादा सख्त बनाने के लिए लाया गया है। इस कड़े कानून के तहत संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले सभी अपराधियों को 10 वर्ष तक की जेल की सजा दी जाएगी। इसके साथ ही परीक्षा में संगठित रूप से धांधली करने वाले ऐसे बड़े अपराधियों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन सख्त सजाओं से सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता हमेशा के लिए सुनिश्चित हो सकेगी। विपक्ष की क्या है बड़ी मांगसंसद में विपक्ष ने सिद्धांत रूप से पेपर लीक को रोकने के लिए इस कड़े कानून का अपना पूरा और सीधा समर्थन किया है। लेकिन विपक्षी दलों का स्पष्ट कहना है कि केवल नए और सख्त कानून बना देने से इस गंभीर समस्या का पूरा समाधान बिल्कुल नहीं होगा। विपक्ष की प्रमुख मांग है कि सरकार पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का जवाब दे। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी गृह मंत्री अमित शाह से इस पुलिस कार्रवाई पर सदन में बयान देने की मांग की है। सरकार और विपक्ष में गतिरोधसोमवार को सरकार इस विधेयक पर चर्चा शुरू कराना चाहती थी लेकिन विपक्ष ने कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च का मुद्दा उठाकर भारी विरोध किया। विपक्षी सदस्य लगातार सरकार से इस पूरे मामले पर बयान देने की मांग करते रहे जिसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों को याद दिलाया कि इस विधेयक पर चर्चा के लिए पूरे 6 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि लोकसभा सिर्फ नारेबाजी करने के लिए नहीं बल्कि जरूरी विधेयकों पर चर्चा करने के लिए चुनी गई है। संसदीय बहस का बड़ा महत्वमंगलवार को लोकसभा में होने वाली यह अहम बहस राजनीतिक और शैक्षिक दृष्टि से भी पूरे देश के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नीट पेपर लीक विवाद के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा सुधारों पर यह पहली बड़ी संसदीय चर्चा है। सरकार इस नए विधेयक को परीक्षा प्रणाली में छात्रों का खोया हुआ भरोसा बहाल करने की दिशा में अपनी सबसे बड़ी पहल बता रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी विपक्ष से बहस में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि देश का युवा यह सब देख रहा है। Post Views: 10 Please Share With Your Friends Also Post navigation शिक्षा मंत्रालय का पदभार संभालते ही एक्शन में प्रह्लाद जोशी, पहले ही दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग की बैठक