नई दिल्ली। स्वच्छ भारत से गांवों में स्वच्छता की बड़ी तस्वीरस्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2014 में हुई थी। इसका लक्ष्य पांच साल में देश को खुले में शौच से मुक्त बनाना था। योजना शुरू होने के समय ग्रामीण इलाकों में केवल 39 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा थी। 2019 तक यह आंकड़ा बढ़कर 100 प्रतिशत हो गया। पहले चरण में 10 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए गए। 17 मार्च 2025 तक देश के 5,86,788 गांव इस अभियान के दायरे में आ चुके थे। इनमें 5,64,096 गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त प्लस घोषित किया था। करीब 5,03,585 गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन और 5,22,462 गांवों में तरल कचरा प्रबंधन की सुविधा पहुंची। स्वच्छता के लिए 6 लाख से अधिक स्वच्छाग्रहियों को भी प्रशिक्षित किया गया। स्वच्छता से बचत और रोजगार का फायदासंयुक्त राष्ट्र बाल कोष के आकलन के अनुसार, खुले में शौच से मुक्त गांवों के परिवार बीमारी और इलाज पर कम खर्च के कारण सालाना 50 हजार रुपये तक बचा सकते हैं। आकलन में योजना से मिलने वाला फायदा इसकी लागत से 4.7 गुना अधिक बताया गया था। स्वच्छ भारत अभियान से करीब 75 लाख पूर्णकालिक रोजगार के बराबर रोजगार पैदा होने का भी अनुमान लगाया गया। बेहतर शौचालय व्यवस्था वाले गांवों में मिट्टी और भूजल के कम प्रदूषित होने जैसे पर्यावरणीय फायदे भी सामने आए। जनधन योजना ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग से जोड़ाप्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत 2014 में उन लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए हुई थी, जिनके पास बैंक खाता नहीं था। योजना के तहत खातों की संख्या 2015 में 14.72 करोड़ से बढ़कर 19 अगस्त 2026 तक 59.09 करोड़ हो गई। इनमें 45.95 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में हैं, जबकि 13.14 करोड़ खाते शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में हैं। कुल खाताधारकों में 32.92 करोड़ महिलाएं हैं। यानी बैंकिंग व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी भी बड़े स्तर पर बढ़ी है। खातों के साथ जमा राशि में भी बड़ा उछालजनधन खातों में जमा राशि भी तेजी से बढ़ी है। मार्च 2015 में इन खातों में 15,670 करोड़ रुपये जमा थे। अगस्त 2026 तक यह राशि बढ़कर 3,16,514 करोड़ रुपये हो गई। यानी करीब 20 गुना की बढ़ोतरी हुई। 19 अगस्त तक जनधन खाताधारकों को 41.29 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड भी जारी किए जा चुके थे। आयुष्मान भारत से इलाज का दायरा बढ़ाआयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को सस्ता और बिना नकद भुगतान वाला अस्पताल इलाज उपलब्ध कराना है, जो महंगे इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। यह योजना अब सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। शुरुआत में योजना में 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आधार पर आबादी के निचले 40 प्रतिशत हिस्से से जुड़े 10.74 करोड़ परिवार शामिल थे। जनवरी 2023 में लाभार्थी आधार बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार कर दिया गया। मार्च 2024 में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के करीब 37 लाख अतिरिक्त परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया। 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग भी दायरे मेंसरकार ने योजना का दायरा बढ़ाते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया। इससे करीब 4.5 करोड़ परिवारों के छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलने का अनुमान है। 30 जून 2026 तक योजना के तहत 29.05 लाख अंतरराज्यीय अस्पताल दाखिलों को मंजूरी दी गई थी, जिनमें 8,383.97 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल थी। डिजिटल इंडिया ने बदला सरकारी सेवाओं का तरीकाडिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत 2015 में हुई थी। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को तकनीक के जरिए लोगों तक पहुंचाना और शहरों तथा गांवों के बीच डिजिटल अंतर कम करना था। भारतनेट के तहत जनवरी 2026 तक करीब 2.15 लाख ग्राम पंचायतें, यानी लक्ष्य का लगभग 97 प्रतिशत, जोड़ी जा चुकी थीं। देशभर में करीब सात लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी थी। गांवों तक इंटरनेट, सेवाएं मोबाइल परमार्च 2026 तक भारत में 106 करोड़ से अधिक ब्रॉडबैंड इंटरनेट ग्राहक थे। देशभर में 6.5 लाख से अधिक साझा सेवा केंद्र और 1.6 लाख डाकघर डिजिटल और सरकारी सेवाएं उपलब्ध करा रहे थे। आधार में पंजीकरण 144 करोड़ से अधिक हो चुका है, जबकि डिजिलॉकर के पंजीकृत उपयोगकर्ताओं की संख्या 70.69 करोड़ से ज्यादा है। यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को बनाया आसानडिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी सफलताओं में यूपीआई भी शामिल है। मोबाइल फोन से तुरंत पैसे भेजने और लेने की सुविधा ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों के लिए काफी आसान बनाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए। इससे लोगों को हर छोटे भुगतान के लिए नकदी रखने या बैंक जाने की जरूरत कम हुई है। सरकारी पैसा सीधे खाते में पहुंचाआधार, जनधन खाते और मोबाइल कनेक्टिविटी ने सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने में भी मदद की है। सरकार के अनुसार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। इससे सरकारी लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका कम करने और भुगतान को सीधे लाभार्थी तक पहुंचाने में मदद मिली है। दूरदराज के लोगों के लिए घर बैठे डॉक्टरडिजिटल तकनीक का फायदा स्वास्थ्य क्षेत्र में भी पहुंचा है। ई-संजीवनी के जरिए लोग ऑनलाइन डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। यह सुविधा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए उपयोगी है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। पढ़ाई और कौशल के लिए भी डिजिटल रास्ताशिक्षा के क्षेत्र में दीक्षा, स्वयं और स्वयं प्रभा जैसे मंचों के जरिए डिजिटल पाठ्यक्रम, किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान, फ्यूचर स्किल्स प्राइम और स्किल इंडिया डिजिटल हब जैसी पहलों के जरिए लोगों को डिजिटल और तकनीकी कौशल देने की कोशिश की जा रही है। 25 साल के सफर में योजनाओं की असली परीक्षाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर इन आंकड़ों से एक तस्वीर जरूर सामने आती है। शौचालय और स्वच्छता से लेकर बैंक खाते, स्वास्थ्य बीमा, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल शिक्षा तक, सरकार की कई योजनाओं का दायरा करोड़ों लोगों तक पहुंचा है। अब इन योजनाओं की अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पहुंच के साथ उनकी गुणवत्ता, इस्तेमाल और लंबे समय का फायदा भी लगातार बना रहे। Post Views: 3 Please Share With Your Friends Also Post navigation केंद्र सरकार की सख्ती का असर: बाल यौन शोषण के मामलों की रिपोर्ट पुलिस को सौंपने पर सहमत हुई ‘मेटा’