रायपुर। जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जन्मे नवजात शिशु को कथित रूप से अवैध तरीके से दूसरे परिवार को सौंपने के मामले में अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल पर मामले में FIR दर्ज कराई गई है। प्रशासन ने इसे बच्चों के अवैध दत्तक ग्रहण और संभावित मानव तस्करी से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई कलेक्टर एवं जिला बालक कल्याण एवं संरक्षण समिति के अध्यक्ष कुणाल दुदावत के निर्देश पर की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी बसंत मिंज के मार्गदर्शन में जिला चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जिला समन्वयक सरिता सिन्हा ने संबंधित लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मां की मौत के बाद शुरू हुआ पूरा मामला दरअसल, कुछ दिन पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक संवेदनशील मामला सामने आया था। करतला क्षेत्र निवासी एक महिला ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन प्रसव के कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद नवजात की जिम्मेदारी को लेकर परिवार में असमंजस की स्थिति बन गई। इसी दौरान यह बात सामने आई कि नवजात को एक अन्य दंपती को सौंपने की तैयारी की गई। मामले ने तब गंभीर रूप ले लिया जब तीन लाख रुपये के कथित लेनदेन से जुड़ा एक इकरारनामा और अनुबंध सामने आया। दस्तावेज में रकम देने और कुछ शर्तों का उल्लेख होने की चर्चा के बाद पूरे मामले को नवजात की खरीदी-बिक्री से जोड़कर देखा जाने लगा। हालांकि बाद में मामला उजागर होने पर कथित अनुबंध पत्र फाड़ दिए जाने की बात सामने आई और परिजन बच्चे को अपने साथ ले गए। अवैध दत्तक ग्रहण पर सख्त कानून महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी भी बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के बिना गोद देना या लेना पूरी तरह अवैध है। विभाग के अनुसार केवल वही बच्चे विधिवत दत्तक ग्रहण के लिए पात्र होते हैं, जिन्हें बाल कल्याण समिति द्वारा “लीगल फ्री फॉर एडॉप्शन” घोषित किया गया हो। अधिकारियों ने बताया कि भारत में दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (CARA) के माध्यम से संचालित होती है। इच्छुक दंपतियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है और महिला एवं बाल विकास विभाग की निगरानी में ही दत्तक ग्रहण की अनुमति दी जाती है। खरीदी-बिक्री या निजी सौदे गैरकानूनी विभाग ने कहा कि बच्चों का किसी भी प्रकार से निजी समझौते, पैसों के लेनदेन या सीधे सौदे के आधार पर दत्तक ग्रहण कराना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में दत्तक ग्रहण विनियम, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और मानव तस्करी से जुड़े कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई और दंड का प्रावधान है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा पहले ही राज्यों को बच्चों के अवैध दत्तक ग्रहण और तस्करी रोकने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। Post Views: 25 Please Share With Your Friends Also Post navigation लिव-इन रिलेशनशिप में विवाद बना खूनी झगड़ा: युवती ने शादीशुदा बॉयफ्रेंड पर किया हमला CG NEWS: जनगणना ड्यूटी में शराब के नशे में मिला सहायक शिक्षक, DEO ने किया निलंबित