रायपुर। छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान हुए पेपर लीक कांड ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हिंदी विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। हालांकि, इस मामले में FIR दर्ज होने के एक सप्ताह बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं और किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।यह मामला मुख्य रूप से रायपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है, जहां इस पूरे प्रकरण की जांच जारी है। वहीं, साइबर सेल भी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। 13 मार्च को लीक, 14 मार्च को वही प्रश्न आए परीक्षा में जानकारी के मुताबिक, 13 मार्च को 12वीं बोर्ड की हिंदी परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर वायरल हुआ था। हैरानी की बात यह रही कि 14 मार्च को आयोजित हिंदी बोर्ड परीक्षा के सेट B में वही प्रश्न उसी क्रम में पूछे गए, जो पहले से वायरल हो चुके थे।इससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था और परीक्षा की गोपनीयता पूरी तरह से भंग हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि मात्र 15 मिनट के भीतर यह पेपर 15 हजार से ज्यादा छात्रों तक पहुंच गया था, जो इस लीक के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। कई जिलों के छात्रों से पूछताछ ने कोरबा, महासमुंद और रायपुर सहित कई जिलों के छात्रों के बयान दर्ज किए हैं। जिन मोबाइल नंबरों और ग्रुप्स के जरिए पेपर शेयर किया गया, उनकी पहचान कर उनसे पूछताछ की जा रही है।हालांकि, अब तक जांच एजेंसियों को कोई ठोस सुराग नहीं मिला है, जिससे इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। यही कारण है कि एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस का बयान मामले को लेकर उमेश गुप्ता, डीसीपी (मध्य) रायपुर पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि पेपर लीक मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। उन्होंने बताया कि जिन नंबरों से प्रश्नपत्र शेयर किया गया है, उन सभी से पूछताछ की जा रही है।उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। पुलिस तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। परीक्षा रद्द, 10 अप्रैल को फिर होगी परीक्षा पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद परीक्षा समिति ने बड़ा फैसला लेते हुए 14 मार्च को आयोजित 12वीं हिंदी की परीक्षा को निरस्त कर दिया है। 23 मार्च को आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए।अब यह परीक्षा 10 अप्रैल को फिर से आयोजित की जाएगी। इस फैसले से लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ेगी, जिससे उनके मानसिक दबाव और तनाव में भी वृद्धि हुई है। शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस पूरे मामले ने राज्य की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों तक प्रश्नपत्र का पहुंचना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी चूक हुई है।विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करती हैं, बल्कि मेहनती और ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करती हैं। साइबर जांच में जुटी टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना और पुलिस की विशेष टीम लगातार डिजिटल ट्रेल खंगाल रही है। सोशल मीडिया ग्रुप्स, मोबाइल नंबर और IP एड्रेस के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पेपर सबसे पहले कहां से लीक हुआ और किसने इसे वायरल किया।इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं से छात्रों का मनोबल टूटता है और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। Post Views: 17 Please Share With Your Friends Also Post navigation दो जेल प्रहरियों को चकमा देकर खतरनाक कैदी फरार, इलाज के दौरान हो गया फरार