बिना धूम्रपान किए फेफड़ों का कैंसर: अगर आपको लगता है कि सिर्फ सिगरेट पीने वालों को फेफड़ों का कैंसर होता है, तो आप गलत हैं। दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में हर महीने ऐसे दर्जनों मरीज सामने आ रहे हैं, जिन्होंने जिंदगी में कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया, फिर भी वे फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। शहर की जहरीली हवा, वाहनों का धुआं और घरों के अंदर का प्रदूषण लोगों के फेफड़ों को उसी तरह गला रहा है, जैसे चैन-स्मोकिंग। धूम्रपान नहीं, शहर का प्रदूषण है असली वजह मेडिकल प्रैक्टिस और हालिया क्लीनिकल डेटा साफ इशारा कर रहे हैं कि अब फेफड़ों के कैंसर को सिर्फ ‘धूम्रपान करने वालों की बीमारी’ मानना एक बड़ी भूल है। शहरी जीवन की कुछ आदतें और मजबूरियां इस खतरे को कई गुना बढ़ा रही हैं। सबसे बड़ा कारण है वायु प्रदूषण। सालों तक पीएम (PM 2.5 और PM 10) जैसे सूक्ष्म प्रदूषित कणों, कंस्ट्रक्शन साइट्स की धूल और इंडस्ट्रियल धुएं के बीच सांस लेना फेफड़ों को छलनी कर रहा है। राजधानी जैसे बड़े शहरों में रहना रोज कई सिगरेट पीने के बराबर हो गया है। बाहरी हवा के अलावा हमारे घरों का वातावरण भी सुरक्षित नहीं है। सेकंड हैंड स्मोक, बायोमास कुकिंग फ्यूल, किचन में खराब वेंटिलेशन और हानिकारक केमिकल्स का सीधा संपर्क फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। इसके अलावा, एस्बेस्टस, सिलिका धूल और डीजल के धुएं के बीच काम करने वाले लोग, फैमिली हिस्ट्री और पहले टीबी के शिकार हो चुके मरीजों में यह खतरा ज्यादा है। खतरे की घंटी: लक्षण और अब आगे क्या? नागरिकों को अब अपने शरीर में होने वाले छोटे बदलावों को भी गंभीरता से लेना होगा। अगर आपको लगातार खांसी आ रही है, अचानक वजन गिर रहा है, बार-बार चेस्ट इन्फेक्शन हो रहा है या सांस लेने में दिक्कत है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हालांकि, इलाज के मोर्चे पर उम्मीद की किरण मौजूद है। मिनीमली इनवेसिव सर्जरी, आधुनिक डायग्नोस्टिक टूल्स, नई दवाएं और इम्यूनोथेरेपी के जरिए इस बीमारी को काबू में किया जा सकता है। जिन लोगों की उम्र ज्यादा है या जो हाई-रिस्क कैटेगरी में आते हैं, उन्हें हर साल लो डोज सीटी स्कैन (Low-Dose CT Scan) करवाना चाहिए। इससे बीमारी समय रहते पकड़ी जा सकती है। शहर के बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए जरूरी है कि जब एक्यूआई (AQI) खराब हो तो बाहर निकलने से बचें, घरों में वेंटिलेशन सुधारें और रूटीन चेकअप को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। Post Views: 12 Please Share With Your Friends Also Post navigation वजन घटाने के लिए रोज कितने कदम चलना जरूरी? जानिए पूरा गणित