रायपुर। छत्तीसगढ़ में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड को समाप्त करने और उसकी जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन की मांग की है।

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा है कि वर्तमान मदरसा शिक्षा व्यवस्था से अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका तर्क है कि मदरसों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे मुख्यधारा की शिक्षा और रोजगार के अवसरों से दूर रह जाते हैं तथा आगे चलकर केवल मौलवी बनकर रह जाते हैं। ऐसे में अल्पसंख्यक समाज के शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास के लिए नई व्यवस्था की आवश्यकता है।

पत्र में सुझाव दिया गया है कि मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाए, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। इससे उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष की इस मांग के बाद प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब इस मामले में राज्य सरकार क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

मामले पर गरमाई सियासत
छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड खत्म करने की मांग को लेकर अबह सियासत भी गर्म होती नजर आ रही है। मामले में कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मदरसा बोर्ड को बंद करने का निर्णय असंवैधानिक है। अल्प संख्यकों को अधिकार है कि अपने हिसाब से शैक्षणिक संस्थाएं खोले। अल्प संख्यकों के संवैधानिक अधिकार का हनन होगा। छग में ऐसा प्रयास होगा तो हम उसका विरोध करेंगे। वहीं शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि इस विषय में अभी परीक्षण किया जा रहा है। ‘पूरी जानकारी के बाद ही स्पष्ट टिप्पणी दी जा सकेगी’। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कई राज्यों में इसे खत्म किया गया है, छग सरकार भी इसे मानेगी। आज कौमी शिक्षा के बजाए प्रोफेशनल शिक्षा जरूरी है। मुस्लिम समाज के गरीब लोगों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि उन्हें सही प्रोफेशनल शिक्षा नहीं मिलती। अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड के गठन होने से सभी वर्गों को फायदा मिलेगा।

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By Chhattisgarh Kranti

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