नई दिल्ली। लोगों के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन की समस्या देखने को मिलती है. यह सूजन अक्सर पैरों, टखनों, हाथों, उंगलियों, चेहरे और आंखों के आसपास दिखाई देती है. सूजन तब होती है, जब शरीर में अधिक तरल जमा होने लगता है. कुछ मामलों में किडनी की क्षमता कम होने से भी शरीर में सूजन हो सकती है।

सिर्फ किडनी की समस्या ही शरीर में सूजन का कारण नहीं होती. इसलिए यह समझना जरूरी है कि सूजन क्यों हो रही है, इसके क्या कारण हो सकते हैं और इसे कैसे रोका जा सकता है. किसी भी असामान्य या बार-बार होने वाली सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर सावधानी और सही जांच से गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है

शरीर में सूजन होना क्या किडनी की खराबी का संकेत है?

सफदरजंग हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजी विभाग में डॉ. हिमांशु वर्मा बताते हैं कि शरीर में बार-बार या लगातार रहने वाली सूजन कभी-कभी किडनी की खराबी का संकेत हो सकती है. किडनी जब ठीक से काम नहीं करती, तो वह शरीर से अधिक पानी और टॉक्सिक पदार्थ बाहर नहीं निकाल पाती. इससे तरल शरीर में जमा होने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में एडिमा कहा जाता है. खासकर पैरों, टखनों और आंखों के आसपास सूजन दिखना किडनी संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकता है।

अगर सूजन के साथ पेशाब में बदलाव, थकान या सांस फूलना जैसी दिक्कतें भी हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हालांकि हर सूजन किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. समय पर पहचान होने से गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।

शरीर में सूजन के अन्य कारण क्या हैं?

शरीर में सूजन सिर्फ किडनी की समस्या से नहीं होती. इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं. लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने से पैरों और टखनों में तरल जमा हो सकता है. ज्यादा नमक या प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी सूजन बढ़ा सकता है।

हॉर्मोनल बदलाव, जैसे प्रेगनेंसी या पीरियड्स के दौरान, शरीर में पानी जम सकता है. एलर्जी, इंफेक्शन या चोट लगने से भी सूजन दिखाई देती है. कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट से भी शरीर में एडिमा हो सकता है. इसलिए सूजन के कारण समझने के लिए पूरी तरह जांच कराना जरूरी है।

कैसे करें बचाव?

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और नमक का सेवन सीमित रखें. संतुलित डाइट लें, जिसमें ताजी सब्जियां और फल शामिल हों. नियमित व्यायाम करें और वजन को कंट्रोल रखें. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज अपने शुगर और बीपी को कंट्रोल रखें, क्योंकि ये किडनी को प्रभावित कर सकते हैं।

बिना डॉक्टर की सलाह के पैन किलर दवाओं का अधिक सेवन न करें. नियमित हेल्थ चेकअप से किडनी की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है

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By Chhattisgarh Kranti

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