नई दिल्ली। डिवार्मिंग बदलते मौसम और लाइफस्टाइल के बीच पेट में कीड़ों (Soil-Transmitted Helminths) की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप ले रही है। अक्सर हम घर के खाने को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अधूरी सफाई और अस्वच्छ पानी इस सुरक्षा चक्र को तोड़ सकते हैं। खासकर बच्चों और पालतू जानवरों के साथ रहने वाले लोगों में यह जोखिम सबसे अधिक देखा गया है।

घर के खाने में कहां छिपी है चूक?

अक्सर घरों में सब्जियों और फलों को केवल पानी से ऊपर-ऊपर धो दिया जाता है। पत्तेदार साग-सब्जियों में मिट्टी के सूक्ष्म कण और लार्वा चिपके रह जाते हैं, जो शरीर के भीतर जाकर कीड़ों का रूप ले लेते हैं। इसके अलावा, पब्लिक टॉयलेट्स का इस्तेमाल, नंगे पैर पार्क में टहलना और भोजन से पहले हाथों को ठीक से न धोना संक्रमण के मुख्य द्वार हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

पेट में कीड़े होने के संकेत शुरुआत में बहुत सामान्य लगते हैं, जिन्हें लोग अक्सर गैस या बदहजमी समझकर टाल देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित लक्षण दिखने पर सचेत हो जाना चाहिए:

  • बिना किसी कारण के लगातार थकान और शारीरिक कमजोरी महसूस होना।
  • भूख में अचानक कमी आना या वजन का लगातार गिरना।
  • पेट में बार-बार दर्द, सूजन (bloating) या एनीमिक होना (खून की कमी)।
  • एनल इचिंग (गुदा मार्ग में खुजली) और बार-बार बीमार पड़ना।

विशेषज्ञों की राय: कब और किसे लेनी चाहिए दवा?

“बच्चों में संक्रमण की दर अधिक होती है, इसलिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में साल में दो बार (हर 6 महीने पर) डिवर्मिंग की सलाह दी जाती है। वयस्कों को बिना मेडिकल परामर्श के रूटीन तौर पर दवा नहीं लेनी चाहिए। यदि आप मिट्टी, पालतू जानवरों या सार्वजनिक स्थलों के सीधे संपर्क में अधिक रहते हैं, तो जांच के बाद ही कोर्स शुरू करें।”सीनियर कंसल्टेंट (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी)

सुरक्षा और सावधानी: किसे रहना है दूर?

डिवर्मिंग की दवाएं प्रभावी हैं, लेकिन यह सबके लिए एक समान नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को बिना डॉक्टर की लिखित सलाह के इन दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। दवाओं का ओवरडोज या बार-बार खुद से इलाज करना शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है।

बचाव के लिए क्या करें?

दवा केवल मौजूदा कीड़ों को खत्म करती है, लेकिन भविष्य में होने वाले संक्रमण को रोकने के लिए आदतों में बदलाव जरूरी है। हमेशा फिल्टर किया हुआ या उबला पानी पिएं, सब्जियों को नमक के पानी से धोएं और बाहर निकलते समय जूते-चप्पल जरूर पहनें।

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By Chhattisgarh Kranti

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