रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार को शुरू होते ही रसोई गैस की आपूर्ति और मूल्यवृद्धि के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने प्रदेश में एलपीजी गैस की कथित कमी और कालाबाजारी को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाया, जिसे अग्राह्य घोषित किए जाने के बाद सदन का माहौल गरमा गया। नाराज विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह तक पहुंच गए, जिसके बाद नियमों के तहत उन्हें स्वमेव निलंबित कर दिया गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने प्रदेश में गैस आपूर्ति की स्थिति को गंभीर बताते हुए इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि पूरे प्रदेश में एलपीजी गैस को लेकर अफरातफरी की स्थिति बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं और आम उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में शादियों का सीजन चल रहा है और कई होटल व खानपान से जुड़े व्यवसाय गैस की कमी के कारण प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि कई जगहों पर होटल बंद होने की स्थिति बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले गैस संकट से इनकार किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। विपक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद सत्तापक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई। भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने कहा कि गैस की समस्या होना अलग बात है, लेकिन यह विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विषय को विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के रूप में लाना उचित मंच नहीं है। इस पर विपक्षी सदस्य और आक्रामक हो गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के बीच विपक्ष के विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंच गए। नियमों के अनुसार गर्भगृह में प्रवेश करने वाले विधायकों को स्वमेव निलंबित माना जाता है। इसके बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं और कई जगहों पर कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गैस वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य स्तर पर भी है तो इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा क्यों नहीं की जानी चाहिए। भूपेश बघेल के बयान के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी होने लगी। कुछ देर तक सदन में हंगामे का माहौल बना रहा। गैस आपूर्ति और मूल्यवृद्धि का मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। विपक्ष जहां इसे आम जनता से जुड़ी गंभीर समस्या बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय बताते हुए विधानसभा में इस पर चर्चा को अनुचित ठहरा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। Post Views: 17 Please Share With Your Friends Also Post navigation CG Open School Board Exam 2026: 10वीं–12वीं ओपन स्कूल बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल जारी, जानें कब से शुरू होंगी परीक्षाएं