16 मई 2026: शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का महासंयोग – संघर्ष से शांति की ओर शनि देव जब कुंडली के इन विशिष्ट भावों (1, 3, 4, 5, 6, 8) से संबंध रखते हैं, तो जीवन एक ‘तपस्या’ बन जाता है। जहाँ व्यक्ति अपनों के हाथों मिले विश्वासघात को भी ईश्वर का न्याय मानकर सह जाता है। कल 16 मई 2026, शनिवार को शनिश्चरी अमावस्या** और शनि जयंती का महासंयोग है। शनि का न्याय: जब अपने ही बोते हैं काँटे और हम माँगते हैं दुआ ज्योतिष शास्त्र में शनि को ‘कर्मफल दाता’ और ‘अनुशासन’ का कारक माना गया है। शनि जब लग्न (1), पराक्रम (3), सुख (4), पंचम (5), शत्रु (6) या अष्टम (8) भाव में स्थित या प्रभावी होते हैं, तो व्यक्ति का जीवन संघर्षों की एक ऐसी श्रृंखला बन जाता है जहाँ उसे बाहरी दुनिया से ज्यादा अपने करीबियों से चुनौतियां मिलती हैं। 1. अपनों का दिया दर्द और शनि का स्वभावशनि का इन भावों में होना अक्सर व्यक्ति को ‘अकेला योद्धा’ बनाता है। शनि प्रधान व्यक्ति में क्षमाशीलता और धैर्य बहुत अधिक होता है। जब चौथे (सुख-परिवार) या छठे (शत्रु) भाव पर शनि की दृष्टि या स्थिति होती है, तो व्यक्ति को घर के भीतर ही विरोध का सामना करना पड़ता है। लेकिन शनि की कृपा यही है कि वह व्यक्ति को इस दर्द के माध्यम से इतना मजबूत बना देते हैं कि वह बुराई के बदले बुराई नहीं, बल्कि दुआ देना सीख जाता है। 2. 16 मई 2026: शनिश्चरी अमावस्या का महायोगकल का दिन शनि देव को समर्पित सबसे बड़ा दिन है। इस दिन शनि जयंती भी है और शनिवार होने के कारण शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी। यह दिन उन लोगों के लिए वरदान की तरह है जो: मानसिक तनाव या ‘अपनों’ की दी हुई पीड़ा से गुजर रह है। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा से प्रभावित हैं जिनके जीवन में संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। 3. शनि शांति के अचूक और सरल उपायशनि देव ‘क्रूर’ नहीं, बल्कि ‘न्यायप्रिय’ हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए कर्मों का शुद्ध होना अनिवार्य है। कल अमावस्या के दिन आप ये उपाय कर सकते हैं:दीप दान: कल शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। यह जीवन के अंधेरे और बाधाओं को दूर करता है।छाया दान: एक कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरें, उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उसे तेल सहित दान कर दें। यह शारीरिक और मानसिक कष्टों को हर लेता है।काले तिल और उड़द: बहते जल में काले तिल और साबुत उड़द प्रवाहित करें या किसी जरूरतमंद को दान दें।हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वह उनके भक्तों को कष्ट नहीं देंगे। कल हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होगा।शमी पूजन: यदि संभव हो तो शमी के वृक्ष की पूजा करें और उसकी जड़ में जल अर्पित करें। 4. आध्यात्मिक दृष्टिकोण: दुआ की शक्तिशनि हमें सिखाते हैं कि जो काँटे बो रहे हैं, वे दरअसल अपना कर्म खराब कर रहे हैं। जब आप उनके लिए दुआ माँगते हैं, तो आप शनि के सर्वोच्च स्तर ‘वैराग्य और करुणा’ को प्राप्त कर लेते हैं। शनि अमावस्या पर किया गया आत्म-चिंतन आपको उन कड़वाहटों से मुक्त कर सकता है जो अपनों ने दी हैं। निष्कर्ष: कल की शनि अमावस्या आपके जीवन में उन काँटों को हटाने वाली साबित हो जो अन्यों ने बोए हैं। शनि देव का आशीर्वाद केवल भौतिक सफलता नहीं, बल्कि वह मानसिक शांति है जहाँ आप शत्रुओं के लिए भी मंगल कामना कर सकें। जय शनि देव। पं. गिरीश पाण्डेयएस्ट्रो-गुरू, भागवत-व्यासएस्ट्रो- सेज पैनल -मेंबरसचिव पुरोहित मंचज़िला- महासमुन्द छ.ग.संपर्क सूत्र – 7000217167संकट मोचन मंदिरमण्डी परिसर,पिथौरा कुंडली संबंधी कार्यों के लिए संपर्क करें(शुल्क -५०१/-) Post Views: 29 Please Share With Your Friends Also Post navigation वट सावित्री व्रत: अखंड सौभाग्य, अटूट विश्वास और समर्पण का महापर्व