उदयपुर, सरगुजा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के उपलक्ष्य में 6 मार्च 2025 को एकता परिषद छत्तीसगढ़ इकाई, उदयपुर सरगुजा के तत्वावधान में महिला अधिकार एवं सम्मान सम्मेलन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पंडो सामुदायिक एकता परिषद भवन, मृगाडांड में संपन्न हुआ, जिसमें 90 गांवों से लगभग 600 महिला-पुरुषों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय समाज सेविका बहन जीलकार हैरिस, वरिष्ठ अतिथि श्रद्धा कश्यप, निर्मला कुजूर और समिति सलाहकार सदस्य सीताराम सोनवानी रहे। जनपद सदस्य श्री सिद्धार्थ सिंह देव, क्षेत्र के पंच, मुखिया, तथा जिला कोरबा एवं सूरजपुर के वरिष्ठ संगठन प्रमुखों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

महिला अधिकारों को लेकर जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम का संचालन रघुवीरदास (प्रदेश संयोजक, एकता परिषद) ने किया। इसकी शुरुआत महात्मा गांधी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन और “जय जगत” गीत के साथ हुई, जिसे अनिता राज, प्रमिला केरकेट्टा, बृजलाल, नंदनी पोर्ते और कर्मपाल ने प्रस्तुत किया।

श्रद्धा कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को भूमि पर समान अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। मृगाडांड संगठन के सचिव मानकुंवर ने बताया कि एकता परिषद के प्रयासों से 63 परिवारों को वनाधिकार पट्टा प्राप्त हुआ, जिससे भूमि सुधार, डबरी निर्माण एवं मछली पालन को बढ़ावा मिला है।

संगठन से मिल रही मजबूती

कोरबा से आए मोहन पंडो ने बताया कि एकता परिषद के सहयोग से उनके गांव ने नशामुक्ति अभियान चलाया और श्रमदान से विकास कार्य किए। बिछलघाटी गांव के अहिबरन पंडो ने कहा कि उनके गांव में अब शराब नहीं बनता और सभी को वनाधिकार पट्टा मिल चुका है।

जनपद सदस्य श्री सिद्धार्थ सिंह देव ने कहा कि एकता परिषद द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले कार्यक्रम प्रेरणादायक होते हैं। उन्होंने महिलाओं के जनप्रतिनिधित्व बढ़ने और मनरेगा, राशन कार्ड, व महिला समूहों के गठन जैसी सरकारी योजनाओं के लाभ की जानकारी दी।

पूर्व जनपद अध्यक्ष (सीतापुर) श्रीमती शांति निराला ने महिलाओं से संगठन से जुड़कर गांव के विकास में सहयोग देने का आग्रह किया।

महिला भू-अधिकार की मांग

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बहन जीलकार हैरिस ने कहा कि महिला भू-अधिकार के बिना महिलाओं का सम्मान अधूरा है। उन्होंने बाल विवाह के दुष्प्रभावों पर भी चर्चा की और कहा कि लड़कियों की शिक्षा छीनना उनके भविष्य और सम्मान के खिलाफ है।

कार्यक्रम का समापन बसंती यादव (एकता परिषद संयोजिका, सूरजपुर) द्वारा अतिथियों के आभार प्रदर्शन के साथ किया गया।

निष्कर्ष

महिला अधिकार एवं सम्मान सम्मेलन ने महिलाओं के भूमि स्वामित्व, सरकारी योजनाओं की भागीदारी, नशामुक्ति, और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा को बल दिया। इस आयोजन से महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।

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By Chhattisgarh Kranti

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