GGU News : बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) के एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) शिविर में छात्रों को नमाज़ पढ़ाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। यह मामला तब सामने आया जब शिविर के दौरान नमाज़ पढ़ने की गतिविधि की जानकारी कुछ छात्रों और स्थानीय लोगों के माध्यम से सामने आई। इस घटना के सामने आते ही विश्वविद्यालय प्रबंधन और जिला पुलिस ने तत्काल जांच प्रक्रिया शुरू कर दी। प्रशासन ने बनाई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए GGU प्रबंधन ने एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी को 48 घंटे के भीतर मामले की पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, शनिवार और रविवार को विश्वविद्यालय बंद रहने के कारण रिपोर्ट सोमवार तक आने की संभावना जताई जा रही है। GGU प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्षता से जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस की जांच भी जारी, छात्रों से अभी नहीं हो पाई पूछताछ वहीं, दूसरी ओर बिलासपुर पुलिस भी मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस की टीम सीएसपी सिटी कोतवाली अक्षय प्रमोद साबद्रा के नेतृत्व में जांच कर रही है। पुलिस ने एनएसएस शिविर में मौजूद प्रोग्राम ऑफिसर्स से पूछताछ की है। एसपी रजनेश सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्रों से भी पूछताछ की जानी है, लेकिन छुट्टियों के चलते अब तक छात्रों से कोई बातचीत नहीं हो पाई है। सोमवार को विश्वविद्यालय खुलने के बाद छात्रों के बयान दर्ज किए जाएंगे। सोमवार तक रिपोर्ट आने की संभावना प्रशासन और पुलिस दोनों के द्वारा की जा रही जांच की रिपोर्ट सोमवार तक सामने आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि इस घटना में कोई नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, और यदि हुआ है तो किस स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ संगठनों ने इसे विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक गतिविधि से जोड़कर देखा है, वहीं कुछ अन्य इसे धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित मसला बता रहे हैं। Post Views: 182 Please Share With Your Friends Also Post navigation Live Suicide Video: ‘पापा बिलासपुर के जंगल मे खोज लेना’, इंस्टाग्राम पर लाइव आकर छात्र ने की आत्महत्या, भयावह वीडियो हो रहा वायरल तलाक के बाद भी पत्नी को भरण-पोषण देना जरूरी, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला