CG – घोड़ों में ‘गैल्डर्स’ की दस्तक : छत्तीसगढ़ में पहला मामला, दो घोड़े संक्रमित जहर देकर मारने का लिया गया निर्णय

अंबिकापुर : उत्तर छत्तीसगढ़ में पहली बार घोड़ों में बेहद संक्रामक और खतरनाक बीमारी ‘गैल्डर्स’ (Glanders) की पुष्टि हुई है। सरगुजा जिले में शादी समारोहों में उपयोग किए जाने वाले दो घोड़ों के रक्त सैंपल जब पांचवीं बार हरियाणा स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वाइन (NRCE) भेजे गए, तब जाकर रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

पुष्टि के बाद जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग ने तय प्रोटोकॉल के तहत दोनों संक्रमित घोड़ों को जहर देकर मारने (Euthanasia) का निर्णय लिया है, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके। गौरतलब है कि गैल्डर्स एक संक्रामक बीमारी है जो घोड़ों, गधों और खच्चरों में पाई जाती है, और विशेष परिस्थितियों में यह मनुष्यों में भी फैल सकती है। इसलिए इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गंभीर माना जाता है।

इस वक्त सरगुजा जिले में कुल 28 घोड़े पंजीकृत हैं। प्रशासन ने सभी घोड़ा मालिकों को सतर्क रहने और आवश्यक जांच कराने की सलाह दी है। संक्रमित घोड़ों के मालिकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, गैल्डर्स का समय रहते पता न चले तो यह तेज़ी से फैल सकती है और गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए पशुपालकों को लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सकों से संपर्क करने की अपील की गई है।

क्या होता है ग्लैंडर्स रोग ?

पशुओं और इंसानों एक संक्रामक रोग है. इस बीमारी के बैक्टेरिया सेल में प्रवेश कर जाते हैं. इलाज से भी यह पूरी तरह नहीं मरते हैं. ऐसे में दूसरे जानवर और इंसान भी इससे संक्रमित हो जाते हैं। यह बीमारी ऑक्सीजन के जरिये फैलती है. शरीर की गांठों में संक्रमण होने के कारण घोड़ा उठ नहीं पाता है और बाद में उसकी मृत्यु हो जाती है. गांठों-ग्रंथियों को प्रभावित करने के कारण इसे ग्लेंडर बरखेलडेरिया मैलाई कहा जाता है।

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By Chhattisgarh Kranti

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