कुंडली में चंद्रमा (Moon) हमारे मन, भावनाओं, मानसिक शांति और माता का कारक होता है। जब चंद्रमा कुंडली के कुछ विशिष्ट भावों में होता है, तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, अस्थिरता या जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिष शास्त्र में विशेष रूप से छठे (6th), आठवें (8th) और बारहवें (12th) भाव (जिन्हें त्रिक भाव कहा जाता है) में चंद्रमा की स्थिति को संवेदनशील माना जाता है। इसके अलावा चौथे (4th) भाव में भी कुछ विशेष परिस्थितियों में सावधानी की आवश्यकता होती है।

आइए जानते हैं कि इन भावों में चंद्रमा होने पर क्या प्रभाव पड़ता है, और उसके लिए क्या सावधानी व उपाय करने चाहिए:

  1. छठा भाव (6th House) – रोग, ऋण और शत्रु का भाव

इस भाव में चंद्रमा होने पर मन जल्दी अशांत होता है और व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर चिंता (Anxiety) करने लगता है।

संभावित प्रभाव: स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव (विशेषकर कफ या पेट से जुड़ी समस्याएं), गुप्त शत्रुओं का भय और स्वभाव में भावुकता के कारण निर्णय लेने में चूक।

सावधानी:
किसी से भी बेवजह कर्ज लेने या देने से बचें।
अपनी योजनाओं को दूसरों के सामने समय से पहले उजागर न करें।
नकारात्मक विचारों और ओवरथिंकिंग (Overthinking) से दूर रहें।

सटीक उपाय:
सोमवार के दिन दूध या पानी का दान करें।
देर रात तक जागने से बचें और रात में दूध पीने से परहेज करें।

  1. आठवां भाव (8th House) – संकट और अनिश्चितता का भाव

इसे ज्योतिष में ‘चंद्रमा का मरण कारक स्थान’ भी कहा जाता है। यहाँ चंद्रमा होने पर व्यक्ति का मूड बहुत तेजी से बदलता है (Mood Swings)।

संभावित प्रभाव: मानसिक अवसाद (Depression), अज्ञात भय, कार्यों में अचानक रुकावट आना और माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता। हालांकि, यह स्थिति अध्यात्म और गूढ़ विज्ञान (Astrology/Occult) के लिए अच्छी भी हो सकती है।

सावधानी:
पानी, नदी या गहरे तालाब के पास जाते समय पूरी सावधानी बरतें।
भावुक होकर या जल्दबाजी में कोई बड़ा जीवन-निर्णय न लें।

सटीक उपाय:
प्रतिदिन या हर सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करें।
‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का नियमित रूप से जप करें।
शमशान या किसी अस्पताल के परिसर में लगे हैंडपंप/नल का पानी पीना शुभ माना जाता है।

  1. बारहवां भाव (12th House) – व्यय और अलगाव का भाव

इस भाव का चंद्रमा व्यक्ति को बहुत अधिक कल्पनाशील, खर्चीला और एकांतप्रिय बनाता है।

संभावित प्रभाव: अनिद्रा (नींद न आना), अत्यधिक खर्च, मानसिक भटकाव और खुद को दूसरों से अलग थलग महसूस करना।

सावधानी:
पैसों के लेन-देन में पूरी सतर्कता रखें, अन्यथा धन व्यर्थ के कामों में बहेगा।
नशे या किसी भी गलत लत से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि यहाँ चंद्रमा भ्रमित कर सकता है।

सटीक उपाय:
घर में कभी भी पानी की बर्बादी न होने दें (जैसे टपकते हुए नल तुरंत ठीक करवाएं)।
सोते समय अपने सिरहाने के पास पानी का पात्र न रखें।
अपनी माता की सेवा करें और उनका आशीर्वाद लें।

  1. चौथा भाव (4th House) – सुख और माता का भाव

यद्यपि चौथा भाव चंद्रमा का अपना घर (कालपुरुष कुंडली के अनुसार) है, लेकिन यदि यहाँ चंद्रमा पीड़ित हो (जैसे शनि या राहु के प्रभाव में), तो व्यक्ति को मानसिक शांति नहीं मिलती।

संभावित प्रभाव: घर में क्लेश, माता से वैचारिक मतभेद, या सुख-सुविधाएं होने के बावजूद भीतर से असंतोष की भावना।

सावधानी:
पारिवारिक मामलों में अत्यधिक भावुक होने की बजाय व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं।
घर की उत्तर-पूर्व (North-East) दिशा को हमेशा साफ-सुथरा रखें।

सटीक उपाय:

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य दें।

चांदी का एक चौकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें या चांदी के गिलास में पानी पिएं।

चंद्र के तांत्रिक मंत्र का ४४००० की संख्या में जप कराएं।

विशेष नोट: चंद्रमा के इन भावों में होने का सटीक फल इस बात पर भी निर्भर करता है कि चंद्रमा किस राशि में है, शुक्ल पक्ष का है या कृष्ण पक्ष का, और उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है। यदि चंद्रमा पर गुरु (Jupiter) जैसे शुभ ग्रह की दृष्टि हो, तो इसके नकारात्मक प्रभावों में भारी कमी आ जाती है।

आचार्य पं गिरीश पाण्डेय
एस्ट्रो-सेज, भागवताचार्य
अमरैया पारा पिथौरा
मो-7000217167

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By Chhattisgarh Kranti

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