गरियाबंद : उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र के घने जंगलों में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी ने हलचल मचा दी है। बुधवार को ग्राम देवलाल सोरी द्वारा पेट्रोलिंग टीम को दी गई सूचना के बाद वन विभाग हरकत में आया। देवलाल ने जंगल में चिरौंजी बीनते समय ताजा पगचिह्न देखे थे और दो भैंसों के शव पड़े होने की जानकारी दी थी। इस घटना से पहले 23 अप्रैल को भी सरपंच पति राम सिंह ने बाघ के पदचिह्नों की जानकारी दी थी।

सूचना मिलते ही वन विभाग की एंटी-पोचिंग टीम और पेट्रोलिंग कर्मियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे इलाके का मुआयना किया। जांच में 100 मीटर के फासले पर दो भैंसों के शव मिले, जिनके शरीर पर बाघ के हमले के स्पष्ट निशान थे। मौके पर दो अलग-अलग आकार के पगचिह्न पाए गए, जिन्हें प्लास्टर ऑफ पेरिस से मोल्ड कर सुरक्षित किया गया है। यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र में संभवतः दो बाघ सक्रिय हैं।

डीएनए जांच से होगी पुष्टि:

वन विभाग की टीम ने बाघ के मल की खोज भी शुरू कर दी है ताकि डीएनए नमूना एकत्र कर देहरादून स्थित टाइगर सेल को भेजा जा सके। इससे बाघ की पहचान और विचरण क्षेत्र की सही जानकारी मिल सकेगी।

ग्रामीणों को किया जा रहा सतर्क:

तेंदूपत्ता संग्रहण के मौसमी दौर और बाघ की सक्रियता को देखते हुए आसपास के गांवों में मुनादी कराई जा रही है। लोगों से अपील की गई है कि वे अकेले जंगलों में न जाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।

कैमरा ट्रैप और निगरानी तेज:

वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं ताकि बाघों की मूवमेंट और स्ट्राइप पैटर्न का विश्लेषण किया जा सके। इससे भविष्य में बाघों की संख्या और व्यवहार पर वैज्ञानिक अध्ययन में मदद मिलेगी।

टाइगर की वापसी या खतरे की घंटी?

उदंती सीतानदी में अंतिम बार बाघ की पुष्टि अक्टूबर 2022 में हुई थी, जब एक बाघ कैमरा ट्रैप में कैद हुआ था। इसके बाद दिसंबर 2022 में मल सैंपल मिला था। अब एक बार फिर जंगल में बाघ की मौजूदगी दर्ज होना न केवल वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अहम है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और सतर्कता का भी विषय बन गया है।

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By Chhattisgarh Kranti

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