नई दिल्ली। आजकल ज्यादातर लोग सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले अपना मोबाइल फोन चेक करते हैं। किसका मैसेज आया, कौन सा नोटिफिकेशन है, सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है, खबरें पढ़ने लगते हैं, लेकिन प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि दिन की सबसे अच्छी शुरुआत तब होती है, जब उठते ही भगवान और संतों का स्मरण किया जाए।महाराज जी ने कई बार अपने सत्संग में इस बात का जिक्र किया है कि सुबह उठने के बाद सबसे पहले पांच संतों का स्मरण और प्रार्थना करें। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास केवल 5 मिनट का होता है, लेकिन इससे जीवन में शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। संतों का ही स्मरण क्यों करें?प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि संतों का पूरा जीवन भगवान की भक्ति और श्रद्धा में समर्पित है। इसलिए संतों का नाम भी पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है। उनका कहना है कि जब हम श्रद्धा के साथ संतों का स्मरण करते हैं, तो केवल उनका नाम ही नहीं लेते, बल्कि उनकी भक्ति, त्याग और आध्यात्मिक जीवन को भी याद करते हैं। इससे मन शांत होता है, स्थिरता आती है और हमारे भीतर सकारात्मक सोच विकसित होती है। किन पांच संतों का स्मरण करते हैं प्रेमानंद जी महाराज?महाराज जी कहते हैं कि आप अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी भी संत का स्मरण कर सकते हैं, लेकिन अपने सत्संग में वे अक्सर इन पांच संतों के नाम लेते हैं- श्री हित हरिवंश महाप्रभु जीस्वामी हरिदास जी महाराजश्री हरिराम व्यास जीश्री रूप गोस्वामी जीश्री सनातन गोस्वामी जी सुबह ही क्यों करें संतों का स्मरण?महाराज जी के अनुसार, सुबह उठने के बाद के कुछ मिनट और घंटे हमारे पूरे दिन की दिशा तय करते हैं। यदि दिन की शुरुआत मोबाइल, सोशल मीडिया या किसी तनावपूर्ण विचारों से होती है, तो पूरा दिन मन विचलित और अशांत हो सकता है। इसके विपरीत, यदि सुबह उठते ही सबसे पहले संतों और भगवान का स्मरण किया जाए, तो मन शांत रहता है, सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और पूरे दिन के लिए बेहतर मानसिक स्थिति बनती है। संतों का स्मरण करने के लाभमन को शांति मिलती है।भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास बढ़ता है।नकारात्मक विचारों से दूरी बनी रहती है।दिन की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ होती है।पूरे दिन ईश्वर की कृपा और सकारात्मकता का अनुभव होता है। इस नियम का पालन कैसे करें?सुबह उठकर कुछ क्षण के लिए आंखें बंद करके श्रद्धा से इन संतों का स्मरण करें। कई श्रद्धालु तुलसी की माला के साथ उनके नाम का जप भी करते हैं। प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा और विश्वास है। पूजा-पाठ के लिए लंबे समय तक बैठना जरूरी नहीं है। यदि कुछ सेकंड भी सच्चे मन और पूर्ण विश्वास के साथ भगवान और संतों का स्मरण किया जाए, तो वह भी पर्याप्त है। Post Views: 9 Please Share With Your Friends Also Post navigation बृजभूषण शरण सिंह के लिए बड़ी राहत, महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में अदालत ने किया बरी