रायपुर। भीषण गर्मी और जल संकट के बीच हसदेव अरण्य को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला सामने आया है। राजस्थान की बिजली कंपनी RVUNL को सरगुजा के हसदेव जंगल में 1742.6 हेक्टेयर जमीन पर कोयला खनन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद लाखों पेड़ों की कटाई का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस कोल ब्लॉक में अदानी समूह माइनिंग ऑपरेशन संभालेगा और यहां से निकलने वाला कोयला राजस्थान के बिजली प्लांट्स में भेजा जाएगा। सबसे बड़ी बात ये है कि जिस इलाके को सरकार के सिस्टम में “हाई कंजर्वेशन एरिया” माना गया, उसी इलाके में अब माइनिंग की तैयारी शुरू हो गई है। वन सलाहकार समिति (FAC) ने 8 मई की बैठक में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में 1000 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल में खनन होगा और पेड़ों की कटाई भी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। हसदेव पहले से ही पीईकेबी और परसा कोल ब्लॉक की वजह से विवादों में रहा है। अब केंते एक्सटेंशन को मंजूरी मिलने के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं और आदिवासी संगठनों का विरोध फिर तेज हो सकता है। रिपोर्ट में ये भी माना गया है कि इस इलाके में हाथियों समेत कई वन्य जीवों की आवाजाही होती है और माइनिंग का असर उनके रास्तों पर पड़ सकता है। इसके बावजूद प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया गया है। Post Views: 70 Please Share With Your Friends Also Post navigation चक्रवात और द्रोणिका के असर से बदला मौसम; छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अंधड़ का अलर्ट… CG News: ‘ढाई-ढाई’ फॉर्मूले पर फिर गरमाई सियासत, बाबा को लेकर BJP के आरोपों पर भूपेश का पलटवार