रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को समाप्त करने के आदेश के बाद विवाद गहराता जा रहा है। विधानसभा में की गई घोषणा के अनुरूप संचालक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा सभी स्तरों पर किए गए संलग्नीकरण को तीन दिनों के भीतर समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है। इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों ने विरोध दर्ज कराते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग शुरू कर दी है। राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष ए. के. चेलक ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह आदेश कई कर्मचारियों के लिए गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकता है। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को पत्र लिखकर विशेष परिस्थितियों में किए गए संलग्नीकरण को यथावत रखने की मांग की है। चेलक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि स्वास्थ्य विभाग में कई कर्मचारियों को प्रशासनिक आवश्यकता, रिक्त पदों की उपलब्धता और सेवाओं के बेहतर संचालन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर संलग्न किया गया था। इनमें ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जो गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग और अन्य जटिल रोगों से जूझ रहे हैं और इलाज के लिए विशेष स्थानों पर कार्यरत हैं। इसके अलावा, बड़ी संख्या में कर्मचारी पति-पत्नी प्रकरण के आधार पर अपने परिवार के निकट स्थानों पर पदस्थ हैं, ताकि पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। ऐसे में यदि अचानक इनका संलग्नीकरण समाप्त कर दिया जाता है, तो उनकी शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कर्मचारी संघ का यह भी कहना है कि इस फैसले का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। कई स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिससे आम जनता को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं बाधित हो सकती हैं। संघ ने सरकार से मांग की है कि मानवीय आधार पर गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों और पति-पत्नी प्रकरण में किए गए संलग्नीकरण को इस आदेश से अलग रखा जाए या उन्हें यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं। इससे एक ओर कर्मचारियों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन भी सुचारू रूप से जारी रह सकेगा। फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या कर्मचारी संघों की मांगों पर कोई राहत मिलती है। Post Views: 24 Please Share With Your Friends Also Post navigation अंबेडकर अस्पताल की बड़ी उपलब्धि: 11 साल के बच्चे के दिल से चिपका दुर्लभ कैंसर निकाला, 4 घंटे चली जटिल सर्जरी… छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: किरायेदारी विवाद में नहीं करेगा हस्तक्षेप, याचिका खारिज