सरकार ने UPI को लेकर जारी किया नई गाइडलाइन, जानिए कितना अमाउंट से अधिक का पेमेंट करने पे लगेगा टैक्स… नई दिल्ली। सरकार और एनपीसीआई ने यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। अब कुछ मामलों में ₹1000 से अधिक के ऑनलाइन भुगतान पर टैक्स लग सकता है। डिजिटल पेमेंट अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन बार-बार होने वाले लेनदेन टैक्स अधिकारियों के राडार पर आ सकते हैं। छोटे-छोटे भुगतान भी साल भर में बड़ी राशि बन जाते हैं, इसलिए नियमों को जानना जरूरी है। यह बदलाव पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए हैं। छोटे भुगतान भी आ सकते हैं जांच मेंयदि कोई व्यक्ति रोजाना ₹400 जैसे छोटे भुगतान करता है, तो यह साल भर में लाखों रुपये का लेनदेन बन सकता है। यदि यह राशि किसी सेवा के बदले में ली जा रही है, तो इसे आय माना जाएगा और टैक्स रिटर्न में दिखाना जरूरी होगा। आयकर विभाग लेनदेन की रकम के साथ उसके पैटर्न पर भी नजर रखता है। लगातार और नियमित आने वाले भुगतान टैक्स जांच का कारण बन सकते हैं, भले ही वे छोटी राशि के हों। डेटा शेयरिंग और निगरानीगूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे यूपीआई ऐप्स का डेटा एनपीसीआई के माध्यम से आयकर विभाग तक पहुंच सकता है। इससे यह पता चलता है कि किस खाते में कितना और किस उद्देश्य से पैसा आया। घरेलू खर्च के लिए हुए भुगतान पर चिंता की जरूरत नहीं है, लेकिन व्यावसायिक सेवाओं के लिए मिले भुगतान को घोषित करना अनिवार्य है। नियमों के तहत पारदर्शिता बढ़ाने और गलत लेनदेन पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। कब लगेगा टैक्सयदि आपकी वार्षिक आय टैक्स योग्य सीमा से अधिक है और आपको सेवाओं के बदले भुगतान मिलता है, तो टैक्स देना अनिवार्य होगा। इसमें ट्यूशन, फ्रीलांसिंग, ऑनलाइन काउंसलिंग, डिजाइनिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। घरेलू या निजी उपयोग के लिए किए गए भुगतान पर टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन बार-बार आने वाली राशि चाहे कितनी भी छोटी हो, अगर वह आय के रूप में है तो उसे रिटर्न में दिखाना पड़ेगा। लेनदेन की नई सीमाएंयूपीआई प्लेटफॉर्म्स पर कुछ नई सीमाएं तय की गई हैं। अब एक दिन में 50 से अधिक बार बैलेंस चेक करने पर सीमा लागू होगी। इसके अलावा अनावश्यक ट्रांजैक्शन कम करने की सलाह दी गई है, ताकि सर्वर पर दबाव कम हो सके। बड़े लेनदेन को प्राथमिकता दी जा रही है और छोटे-छोटे नियमित भुगतान को नियंत्रित करने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। यह बदलाव सुरक्षित और स्थिर डिजिटल भुगतान प्रणाली बनाए रखने के लिए किए गए हैं। सावधानी और सुझावयदि आप डिजिटल भुगतान का नियमित उपयोग करते हैं, तो लेनदेन का रिकॉर्ड सही तरीके से रखें। अनावश्यक या बार-बार के ट्रांजैक्शन से बचें और सेवाओं के बदले मिले भुगतान को रिटर्न में शामिल करें। घरेलू खर्च के लिए यूपीआई का प्रयोग सामान्य है, लेकिन व्यावसायिक लेनदेन के लिए टैक्स नियमों का पालन करना जरूरी है। समय पर जानकारी अपडेट करना और नियमों का पालन करना आपको टैक्स से जुड़ी परेशानियों से बचा सकता है। Post Views: 115 Please Share With Your Friends Also Post navigation Income Tax Bill 2025: लोकसभा में पास हुआ नया इनकम टैक्स बिल, मिडिल क्लास पर पड़ेंगे 5 बड़े असर…. Indian Navy Recruitment 2025: नौसेना में 10वीं पास के लिए नई भर्ती, 1250 से अधिक पदों पर फॉर्म भरने की डेट देख लें…