CG: स्कूल पर 1 लाख जुर्माना : प्राइवेट स्कूल प्रबंधन चला रहा था प्राइवेट पब्लिसर्स की किताबें, DEO ने कार्रवाई का जारी किया आदेश…

अम्बिकापुर। सरगुजा जिले के बिड़ला ओपन माइंड स्कूल सरगवां में शिक्षा नियमों के विरुद्ध चल रही अनियमितताओं की शिकायत अभिभावक राहुल अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय (शिकायत क्रमांक PMOPG/E/2025/006407) में की थी। शिकायत में कहा गया था कि विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालते हुए महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें और ड्रेस एक ही दुकान से खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है। यहां तक कि 24 पन्नों की एक पतली किताब 650 रुपये तक की कीमत पर बेची जा रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त शिकायत की जांच का दायित्व प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मणिपुरवार्ड, अम्बिकापुर को सौंपा गया। जांच में सामने आया कि—

  1. विद्यालय में छत्तीसगढ़ एससीईआरटी अथवा एनसीईआरटी की पुस्तकों का उपयोग किसी भी कक्षा में नहीं किया जा रहा है।
  2. नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू की गई हैं।
  3. पुस्तकें, स्टेशनरी और गणवेश केवल “किताब घर” नामक एक ही दुकान से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
  4. प्रबंधन द्वारा कक्षा 1 से 4 तक कार्य पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी पर रोक लगाई गई है, जबकि कक्षा 5 से 8 तक आंशिक छूट दी गई है।
  5. विद्यालय राज्य बोर्ड से संबद्ध होने के बावजूद सरकारी पुस्तकों की अनदेखी कर मनमानी कर रहा है।

शिकायत प्रमाणित, कारण बताओ नोटिस जारी

जांच में अभिभावक की शिकायतें सही पाई गईं। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से विद्यालय प्रबंधन को क्रमांक 10155 दिनांक 18 जुलाई 2025 तथा क्रमांक 11150 दिनांक 19 अगस्त 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। प्रबंधन द्वारा दिए गए जवाब को असंतोषजनक पाया गया।

आर्थिक दंड और चेतावनी

जांच रिपोर्ट के आधार पर बिड़ला ओपन माइंड स्कूल सरगवां पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि यह राशि “शिक्षा खेल कला और संस्कृति” शीर्षक के अंतर्गत चालान के माध्यम से शासन के खजाने में जमा करानी होगी और उसकी मूल प्रति तीन दिवस के भीतर प्रस्तुत करनी होगी।

इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति होने पर संस्था की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

अभिभावकों में आक्रोश, कार्रवाई से संतोष

इस मामले ने जिले में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कई अभिभावकों ने कहा कि वे लंबे समय से प्रबंधन की इस मनमानी का शिकार हो रहे थे। अब प्रशासनिक कार्रवाई से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। वहीं शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लूट या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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By Chhattisgarh Kranti

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