बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के बाद महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक अहम और नजीर बन सकने वाला फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि सहमति से तलाक होने के बावजूद पति को अपनी पूर्व पत्नी को भरण-पोषण देना होगा, जब तक कि वह दूसरी शादी नहीं कर लेती। कोर्ट ने इसे पति की “नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी” करार दिया है। यह फैसला उस याचिका पर आया है, जो मुंगेली जिले के एक युवक द्वारा फैमिली कोर्ट के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की गई थी। युवक ने फैमिली कोर्ट द्वारा उसकी पूर्व पत्नी को दिए गए मासिक भरण-पोषण राशि 3,000 रुपये के आदेश को चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि दोनों के बीच आपसी सहमति से तलाक हो चुका है, इसलिए अब वह भरण-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं है। हाईकोर्ट ने युवक की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय दंपत्ति जीवन में तलाक चाहे आपसी सहमति से हो या किसी अन्य आधार पर, महिला की आर्थिक स्थिति और पुनर्विवाह न होने की स्थिति में पति की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला जब तक पुनः विवाह नहीं करती, तब तक उसे भरण-पोषण की जरूरत बनी रहती है, और यह जिम्मेदारी पति की ही रहेगी। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता युवक की शादी 12 जून 2020 को हुई थी। पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ने के चलते दोनों ने 20 फरवरी 2023 को आपसी सहमति से तलाक ले लिया था। तलाक के बाद पत्नी ने फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने पति को हर माह ₹3,000 देने का आदेश दिया था। इस फैसले को महिला अधिकारों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह न केवल महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक मजबूत संदेश देता है कि विवाह और तलाक केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जुड़े होते हैं। Post Views: 250 Please Share With Your Friends Also Post navigation CG – यूनिवर्सिटी में नमाज मामला : सोमवार तक आ सकती है रिपोर्ट, एसएसपी बोले, जांच पूरी होने के बाद पुलिस लेगी एक्शन CG News : फर्जी डॉक्टर के ऑपरेशन से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत, अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक पर FIR