रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में धान खरीदी का मुद्दा छाया रहा। विपक्षी सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सरकार को घेरते हुए धान उपार्जन व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सदन में सरकार की धान नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार की धान नीति पूरी तरह विफल रही है और किसानों को पहले दिन से ही संदेह की नजर से देखा गया। महंत ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अनेक किसानों का धान समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा गया। महंत ने कहा कि टोकन सिस्टम, रकबा सत्यापन और रकबा समर्पण जैसी प्रक्रियाओं ने किसानों को अत्यधिक परेशान किया। उन्होंने जांजगीर, बालोद, धमतरी, खैरागढ़ सहित कई जिलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां किसानों को धान बेचने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विपक्ष ने किसान आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों के मामलों को भी सदन में उठाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार धान और किसान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। बघेल ने दावा किया कि अधिकारियों द्वारा किसानों के घरों में जबरन प्रवेश कर भौतिक सत्यापन किया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि उनके अपने निवास पर भी अधिकारी प्रवेश कर गए थे। विपक्ष का कहना था कि धान बेचने की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया गया है कि बड़ी संख्या में पंजीकृत किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह गए। स्थगन प्रस्ताव में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 27 लाख 36 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों में से लगभग 2 लाख 11 हजार किसान धान नहीं बेच सके। इनमें बड़ी संख्या अनुसूचित क्षेत्र के किसानों की बताई गई। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि गणितीय दृष्टि से खरीदी की मात्रा और उत्पादकता के आंकड़ों में असंगति है, जिससे फर्जी या अवास्तविक खरीदी की आशंका पैदा होती है। विपक्षी सदस्यों ने इस पर विस्तृत चर्चा और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। इस बीच आसंदी ने स्पष्ट किया कि स्थगन प्रस्ताव की सूचना प्राप्त हुई थी और सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। संसदीय कार्यमंत्री ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बजट सत्र में आय-व्यय और वित्तीय विषयों पर चर्चा प्राथमिकता होती है, इसलिए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा संभव नहीं है। स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य किए जाने के बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह तक पहुंच गए। सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बनी रही। गर्भगृह में पहुंचने के चलते संबंधित सदस्यों के स्वमेव निलंबन की स्थिति बनी। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने भी कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक किसानों का धान भी कई स्थानों पर नहीं खरीदा गया। उन्होंने मांग की कि या तो किसानों की कर्ज माफी की जाए या धान खरीदी की प्रक्रिया पुनः शुरू की जाए। Post Views: 19 Please Share With Your Friends Also Post navigation विश्वविद्यालय के ‘रंगोत्सव’ कार्यक्रम में छात्रों के बीच जमकर मारपीट, कैंपस में मचा हंगामा जेल बंदियों की मौत पर सदन गरमाया, जीवन ठाकुर-पंकज साहू की मौत की विधानसभा कमेटी से जांच की मांग, डिप्टी सीएम के इंकार पर वाकआउट