महासमुंद/रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस ने वाहन चोरी करने वाले एक बेहद शातिर और संगठित गिरोह का राजफाश किया है. इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट करने वाला कोई पेशेवर चोर नहीं, बल्कि पुलिस विभाग का ही एक पूर्व कर्मचारी है. गांजा तस्करी के मामले में वर्ष 2016 में जेल जा चुके बर्खास्त आरक्षक (कांस्टेबल) दिनेश कुमार टंडन ने जेल के भीतर ही इस गैंग को तैयार किया था. बाहर आते ही इस गिरोह ने बाइक, कार और ट्रैक्टरों की धड़ाधड़ चोरी करना शुरू कर दिया. जेल के अंदर मुलाकात, बाहर आकर वारदात पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्य आरोपी दिनेश कुमार टंडन जब जेल में बंद था, तब वहां उसकी मुलाकात अलग-अलग अपराधों में बंद आरोपियों से हुई. जेल के भीतर ही उन्होंने एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया कि बाहर निकलने के बाद किस तरह वाहनों की चोरी करनी है और उन्हें कहां खपाना है. जेल से रिहा होने के बाद इस गिरोह ने महासमुंद, रायपुर और आसपास के इलाकों में सक्रिय होकर ताबड़तोड़ चोरियों को अंजाम देना शुरू कर दिया. विशेष टीम ने कसा शिकंजा क्षेत्र में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की वारदातों को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया था. तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिरों के जाल और डाटा एनालिसिस की मदद से पुलिस इस शातिर सिंडिकेट के करीब पहुंची और घेराबंदी कर मास्टरमाइंड बर्खास्त कांस्टेबल समेत गिरोह के अन्य सदस्यों को धर दबोचा. वाहनों की खेप बरामद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर भारी मात्रा में चोरी के वाहन बरामद किए हैं. प्राथमिक पूछताछ में गिरोह ने वाहन चोरी की कई बड़ी वारदातों को स्वीकार किया है. चुराए गए वाहनों को ग्रामीण क्षेत्रों में औने-पौने दामों में खपाने की तैयारी की जा रही थी. फिलहाल पुलिस पकड़े गए सभी आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और सफेदपोशों और खरीदारों के नामों का खुलासा होने की उम्मीद है. Post Views: 9 Please Share With Your Friends Also Post navigation इंद्रावती भवन में बड़ा हादसा टला, आधे घंटे तक लिफ्ट में फंसे रहे कई अधिकारी-कर्मचारी; मेंटेनेंस पर उठे सवाल छत्तीसगढ़ में बड़ा बदलाव: 1 अक्टूबर से प्रीमियम शराब दुकानों पर नहीं चलेगा कैश, केवल ऑनलाइन पेमेंट