नई दिल्ली। होली के ठीक पांच दिन बाद मनाया जाने वाला रंग पंचमी का पर्व इस साल 08 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को समर्पित यह त्योहार न केवल रंगों का उत्सव है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक महत्व भी है। मान्यता है कि इस दिन हवा में उड़ने वाला गुलाल सकरात्मक ऊर्जा का संचार करता है और देवताओं को प्रसन्न करता है।

तिथि और शुभ मुहूर्त का सटीक विवरण
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा:

पंचमी तिथि का आरंभ: 07 मार्च 2026, शनिवार को शाम 07 बजकर 17 मिनट से।
पंचमी तिथि का समापन: 08 मार्च 2026, रविवार को रात 09 बजकर 10 मिनट पर।
उदयातिथि की शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, रंग पंचमी का मुख्य उत्सव 08 मार्च को ही मनाया जाएगा। इसी दिन सुबह से ही गुलाल और अबीर से देवी-देवताओं की आराधना की जाएगी।

धार्मिक महत्व: क्यों खास है देवताओं की ‘होली’?
रंग पंचमी को लेकर पौराणिक मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आकर भक्तों के साथ अदृश्य रूप में होली खेलते हैं। यह पर्व मुख्य रूप से ‘रज’ और ‘तम’ गुणों पर विजय पाकर ‘सत्व’ गुण के उदय का प्रतीक है। मध्य प्रदेश (विशेषकर इंदौर के राजवाड़ा), महाराष्ट्र और राजस्थान के कुछ हिस्सों में इस दिन विशाल जुलूस निकाले जाते हैं जिसे ‘गेर’ कहा जाता है।

सावधानियां और तैयारी
रंग पंचमी के दिन स्थानीय प्रशासन (जैसे उज्जैन और इंदौर नगर निगम) विशेष सतर्कता बरतता है। प्रमुख मंदिरों जैसे महाकालेश्वर और खजराना गणेश में भारी भीड़ जुटने की संभावना है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे सुबह 11 बजे से पहले दर्शन की योजना बनाएं। प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू रह सकता है, इसलिए घर से निकलने से पहले स्थानीय पुलिस की एडवाइजरी चेक करें।

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By Chhattisgarh Kranti

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